वाराणसी : सकल घरेलू उत्पाद बढ़ाने के लिए अब जिले का डिस्ट्रिक्ट प्लान बनाया जा रहा है। भारतीय प्रबंध संस्थान लखनऊ के विशेषज्ञों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। बनारस की जीडीपी में प्रति वर्ष तीन से चार फीसद वृद्धि की कोशिश है। वर्तमान में जिले की जीडीपी 18 हजार 612 करोड़ है। तीन स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए जीडीपी आकलन शुरू हुआ है। हालांकि इसके लिए अभी काफी कसरत करनी पड़ेगी। सही आंकड़े जुटाने के साथ उसके विश्लेषण से कारोबार बढ़ाने की कवायद करनी होगी। जिले की इस नई योजना के सही आंकड़ों को व्यवस्थित करना ही चुनौती है। कारोबार व विकास तो हो रहा है लेकिन अर्थशास्त्र के मानक पर ठीक करने की जरूरत है।

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने सोमवार को जिले की जीडीपी बढ़ाने के लिए डिस्ट्रिक्ट प्लान का शुभारंभ किया था। औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग ने विकास के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तहत देश के छह जिलों का चयन किया है। इसमें बनारस भी है। देश की विकास दर बढ़ने का मतलब यह नहीं कि सभी जिलों का विकास हो रहा है। जिला स्तर पर विकास का खाका तैयार करने की योजना बनाई गई है। विभागों के पास आंकड़ों के अलावा जिले की जीडीपी क्या है, इसे कैसा बनाया और समझा जाए इसे लेकर ही उलझन की स्थिति है। आइआइएम की ओर से इन बिंदुओं को ही व्यवस्थित करने की कोशिश की जा रही है। विभागों से आंकड़े व फीड बैक मांग वैज्ञानिक तरीके से विकास की राह पकड़ी जाएगी। जिले की तीन आर्थिक गतिविधियों पर जीडीपी का आकलन

राज्य सरकार की ओर से हर जिले की जीडीपी का आंकड़ा तैयार किया जाता है। तीन स्तर पर आर्थिक गतिविधियों के तहत बनारस का जीडीपी बना है। प्राइमरी गतिविधियों में खेती, वानिकी, मत्स्य पालन व खनन शामिल है। इन आर्थिक गतिविधियों में 2679.55 करोड़ का जीडीपी है। सेकेंडरी में मैन्यूफैक्च¨रग, निर्माण व सेवा क्षेत्र शामिल है। सेवा क्षेत्र में बिजली, गैस, पानी की सप्लाई और अन्य उपयोगी सुविधाएं शामिल हैं। इसमें जीडीपी 4654.75 करोड़ है। तीसरी गतिविधि में अधिकार क्षेत्र है। इसमें होटल, रेस्टोरेंट, ट्रैफिक, ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज, कम्यूनिकेशन, रियल इस्टेट, प्रोफेशनल सर्विस, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन शामिल है। इस सेक्टर का जीडीपी सबसे ज्यादा 11277.96 करोड़ है। तीनों को मिलाकर 18612.26 करोड़ की जीडीपी है। आइआइएम के निदेशक डॉ. अजीत प्रसाद ने बताया कि तीन माह में डिस्ट्रिक्ट प्लान की रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। इस योजना में रोजगार सृजन और आय में बढ़ोतरी पर फोकस होगा। बनारस के संदर्भ में मूल तथ्यों के अध्ययन के आधार पर पर्यटन, स्वास्थ्य, हस्तशिल्प, कृषि, उद्योग आदि क्षेत्रों को चिह्नित किया जाएगा। ज्यादा रोजगार की संभावना वाले क्षेत्र को बढ़ावा देने की रणनीति बनेगी।

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