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रामलीला में हाथियों के प्रयोग पर लगा प्रतिबंध, कागजात दिखाने में असफल रहा काशिराज परिवार

By Jashwant SinghEdited By: Abhishek sharma
Published: Sun, 25 Oct 2026 06:40 PM (IST)

रामनगर की रामलीला में हाथियों के प्रयोग पर वन विभाग ने पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला एक हाथी ...और पढ़ें

रामनगर रामलीला में हाथियों पर प्रतिबंध: महावत की मौत और कागजात की कमी बनी वजह।

रामनगर रामलीला में हाथियों पर प्रतिबंध: महावत की मौत और कागजात की कमी बनी वजह।

HighLights

  1. रामनगर रामलीला में हाथियों के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध।

  2. महावत की मौत और दस्तावेज न देने पर वन विभाग का फैसला।

  3. 200 साल पुरानी रामलीला परंपरा में हाथियों का प्रयोग रुका।

जागरण संवाददाता (रामनगर) वाराणसी। यूं तो रामनगर की रामलीला रविवार को समाप्त हो गयी लेकिन जाते जाते सभी के मन मे एक सवाल छोड़ गयी कि क्या अगले वर्ष रामनगर की रामलीला में हाथियों का प्रयोग हो पायेगा या नही। हाालांकि‍ शनिवार को हाथियों के प्रयोग पर वन विभाग ने पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया।

बीते 18 अक्टूबर को आजमगढ़ से रामलीला में आया हाथी मस्तक (नाम) अपना मानसिक संतुलन खो बैठा उसने अपने महावत छापालु को घायल कर दिया था। जिसके बाद शुक्रवार को इलाज के दौरान संक्रमण फैलने से उसकी मौत हो गयी थी छापालू की मौत के बाद वन विभाग ने मामले में कड़ी कार्यवाही की है वह विभाग ने रामनगर की रामलीला, अन्य लीलाओं सहित हाथी के समारोहों में प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।

वन विभाग वाराणसी की प्रभागीय वनाधिकारी निधि चौहान ने बताया कि 18 अक्टूबर को हाथी द्वारा बड़ी घटना कारित की जा सकती थी। बहुत मुश्किल से हाथी पर काबू पाया गया था महावत की भी मौत हो गयी है । इस सबको देखते हुए जन समारोहों में हाथी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

उन्होंने बताया कि रामलीला से जुड़े अधिकारियों को सम्बंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया था लेकिन पांच में से किसी भी हाथी के संबंध में कोई दस्तावेज नही प्रस्तुत किया गया। जिस कारण प्रतिबंध लगाया गया है, अगले वर्ष भी संबंधित कागजात दिखाए जाने के बाद ही हाथियों का प्रयोग संभव होगा।

रामलीला के अंतिम दो दिनों में इस आदेश के प्रभावी होने से हाथियों का प्रयोग नही हुआ वन विभाग के इस फैसले से 200 वर्ष पुरानी परंपरा टूट गयी । ज्ञात हो कि 30 दिवसीय रामलीला के आयोजन के लिए प्रतिदिन चार हाथियों का प्रयोग किया जाता है।

वहीं शाही सवारी जैसी लीलाओं में पांच हाथी होते हैंं, यह सभी हाथी एक महीने के लिए किराए पर आते हैंं। इस बार तीन हाथी आजमगढ़, एक हाथी प्रयागराज व एक हाथी रोहतास बिहार से मंगवायी गयी थी। प्रतिबंध के बाद सभी को शनिवार को ही वापस भेज दिया गयाफ। वहीं मानसिक संतुलन खोया हाथी मस्तक अब ठीक है मंगलवार को मस्तक अपने घर आजमगढ़ ले जाया जाएगा।