वाराणसी, जागरण संवाददाता। जिले को जाम मुक्त बनाने की दिशा में कमिश्नरेट की यातायात व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने का खाका एक माह पहले खींचा गया था। इसके तहत जहां दिवस विशेष के हिसाब से ट्रैफिक व्यवस्था प्रबंधन की योजना थी, वहीं 45 वर्ष से अधिक उम्र के होमगार्डों को हटाकर महकमों को चुस्त दिखाने का दावा किया गया था। सावन का महीना शुरू हुए एक सप्ताह भी नहीं हुआ और व्यवस्थाओं की कलई खुलने लगी। जाम के चलते न केवल दर्शनार्थी बल्कि आम जनता भी कराहने लगी है। यह स्थिति शुक्रवार की भी रही। कमच्छा-रथयात्रा मार्ग, सिगरा-रथयात्रा मार्ग, रथयात्रा चौराहा, लंका चौराहा आदि अधिकांश समय जाम की चपेट में रहे।

दरअसल, लोगों के निकलने के पैटर्न का गहन अध्ययन करने के बाद कमिश्नरेट में यातायात प्रबंधन का खाका नए सिरे से खींचा गया था। सप्ताह के दिन के हिसाब से यातायात व्यवस्था भी बदलते रहने की कवायद थी। इसके लिए 45 वर्ष से कम उम्र के होमगार्ड तैयार किए गए। हवाला दिया गया कि यातायात नियंत्रण के लिए चपलता की जरूरत होती है, जिसके लिए युवा ही उपयुक्त हैं। चौराहों व संकरी सड़कों पर लोग जाम से जूझते रहते हैं। ऐसे में युवा होमगार्ड स्थिति को जल्द नियंत्रित कर सकते हैं। कमिश्नरेट की यातायात व्यवस्था संभालने के लिए 45 वर्ष से कम उम्र के 400 एवं 55 से 50 वर्ष के 10 होमगार्ड हैं। इसके अलावा तीन टीआइ, 22 टीएसआइ, 190 कांस्टेबल, 90 हेड कांस्टेबल हैं।

बरसात की वजह से कुछ मार्गों पर दिक्कत होती है, लेकिन वह कुछ समय के लिए ही होता है

बिना अतिरिक्त बल के हम रूट डायवर्जन लेकर बेहतर यातायात प्रबंधन कर रहे हैं। यातायात दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन कर जनता भी भरपूर सहयोग कर रही है। बरसात की वजह से कुछ मार्गों पर दिक्कत होती है, लेकिन वह कुछ समय के लिए ही होता है।

- विकास कुमार, अपर पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक) पुलिस कमिश्नरेट-वाराणसी।

 

Edited By: Saurabh Chakravarty