वाराणसी, जेएनएन। बनारस में जनता से जुड़ी मूलभूत सुविधाओं को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय बराबर निगरानी कर रहा है। इस क्रम में जब शनिवार को वरुणापार पेयजल परियोजना में आई गड़बड़ी से पानी की आपूर्ति बाधित हुई तो मसला मुख्यमंत्री तक पहुंच गया। परिणाम, रविवार को एक ओर जहां युद्ध स्तर पर गड़बड़ी को दुरुस्त करने का कार्य हो रहा था तो दूसरी ओर अफसर कार्य प्रगति रिपोर्ट से मुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत करा रहे थे।

देर रात भेजी गई जानकारी में सोमवार की सुबह तक गड़बड़ी दुरुस्त कर आपूर्ति बहाल कर लेने का भरोसा दिया गया। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक राजीव रंजन ने बताया कि पहड़िया स्थित एक होटल के पास पेयजल की फीडर मेन लाइन में लीकेज हो गया था। उन्होंने आशंका जाहिर की कि ट्रेंचलेस पाइप लाइन का कार्य होने के दौरान फीडर मेन पाइप लाइन डैमेज हुआ है। हालांकि, इस किस कार्यदायी संस्था की कारस्तानी है, वे जानकारी नहीं दे सके। कहा कि मामले की जांच हो रही है। फीडर मेन पाइप कैसे डैमेज हुआ, पता लगा लिया जाएगा। बताया कि चार मीटर की डैमेज पाइप को बदलकर नया लगा दिया गया है। देर रात ट्रेस्टिंग शुरू होगा। जानकारी दी कि नई परियोजना में नलकूप से पेयजल आपूर्ति का विकल्प भी रखा गया है। गंगा आधारित पेयजल योजना में गड़बड़ी होने पर इमरजेंसी के दौरान नलकूप चलाए जाएंगे। यही हुआ भी। जब फीडर मेन पाइप में गड़बड़ी आई तो सारनाथ, पहड़िया, अकथा, तरना आदि वार्डवार लगे छह नलकूपों को चालू कर प्रभावित इलाके में आपूर्ति की गई। सारनाथ के बरईपुर में स्थापित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से वरुणापार के करीब 12 हजार पेयजल कनेक्शन सीधे तौर पर जुड़े हैं। इन कनेक्शनों से करीब दो लाख की आबादी को पेयजल मिलता है। मुख्य फीडर बाधित होने से इन घरों में पानी प्रभावित रहा। हालांकि जल निगम के अधिकारियों का कहना है कि वरुणापार के 28 ट्यूबेल पूरे दिन चलाये गए। जिनसे घरों में पानी की सप्लाई दी गई लेकिन बावजूद उसके ओवरहेड टैंक नहीं भरने से ऊंचे स्थानों पर घर बनाये लोगों व बहुमंजिली भवनों में पानी नहीं चढ़ा।

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ट्रेंचलेस पाइप बिछाने के कार्य से बहुत नुकसान

वरुणापार पेयजल परियोजना की बात करें तो ट्रेंचलेस पाइप लाइन बिछाने के कार्य से बहुत नुकसान हुआ है। इससे पूर्व कार्यदायी कंपनी मेघा ने जिलाधिकारी को पत्र के साथ फोटो भेजकर करोड़ों का नुकसान होने की जानकारी दी थी। इसमें सर्वाधिक आइपीडीएस व गेल के कार्यों से नुकसान बताया गया। इसकी क्षतिपूर्ति की मांग पूरी नहीं हुई कि अब ब्रांच लाइनों को डैमेज करने के साथ फीडर मेन पाइप लाइनें भी ध्वस्त होने लगी हैं।

Edited By: Abhishek Sharma