दीपावली जैसे त्योहार पर उपहार दें समझदारी से, बचत और निवेश का विकल्प भी बेहतर तोहफा
त्योहारों पर उपहार खरीदते समय बजट, कर नियमों और वित्तीय विकल्पों पर विचार करें। सीए अनुभा तिवारी ने दीपावली जैसे ...और पढ़ें

त्योहारों पर समझदारी से चुनें उपहार: बजट, कर और वित्तीय विकल्पों का रखें ध्यान।
HighLights
उपहार खरीदते समय बजट और कर नियमों को समझें।
शेयर या बांड जैसे वित्तीय उपहारों पर विचार करें।
जीएसटी और हस्तांतरण नियमों के लिए विशेषज्ञ सलाह लें।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। त्योहारों में उपहार खरीदने से पहले बजट बनाएं, कर लाभ के नियम समझकर ही खर्च करें, इसके साथ ही सामान के साथ शेयर या बांड देने पर भी विचार कर सकते हैं। लेकिन इसके हस्तांतरण और कर संबंधी नियम पहले जान लें। सीए अनुभा तिवारी ने दीपावली जैसे त्योहार पर आर्थिक सुरक्षा के तोहफे पर भी गौर करने की जानकारी साझा की है।
बताया कि त्योहारों का मौसम आते ही परिवार, मित्रों, कर्मचारियों और कारोबारी सहयोगियों को उपहार देने की तैयारी शुरू हो जाती है। मिठाई, कपड़े, इलेक्ट्रानिक सामान और दूसरे उपहार इस परंपरा का हिस्सा हैं। लेकिन इस बार उपहार चुनते समय एक अलग सोच अपनाई जा सकती है। ऐसा उपहार क्यों न दिया जाए, जो खुशी देने के साथ भविष्य में आर्थिक उपयोग भी आए, हालांकि इसके लिए बजट, पाने वाले की जरूरत और कर संबंधी नियमों को समझना जरूरी है।
जीएसटी में छूट का दावा सोचकर करें
उपहार खरीदते समय जीएसटी का भुगतान हुआ है, तो इसका अर्थ यह नहीं कि कारोबारी उस कर का लाभ भी ले सकता है। जीएसटी के नियमों में मुफ्त उपहार के रूप में बांटे गए सामान पर सामान्य तौर पर इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलता।
कर्मचारियों को वित्त वर्ष में कुल 50 हजार रुपये तक दिए गए उपहारों के लिए जीएसटी में अलग व्यवस्था है, लेकिन इससे उपहार पर खरीदी के समय चुकाए गए कर का क्रेडिट अपने आप नहीं मिल जाता। इसलिए कोई निर्णय लेने से पहले कर सलाहकार से स्थिति स्पष्ट कर लेना बेहतर है।
शेयर या बांड भी हो सकते हैं विकल्प
हर उपहार का मतलब कोई सामान खरीदना ही नहीं है। कुछ परिस्थितियों में शेयर या बांड देने पर भी विचार किया जा सकता है। ऐसा उपहार पाने वाले व्यक्ति के लिए भविष्य में उपयोगी साबित हो सकता है, लेकिन इसमें निवेश का जोखिम, मूल्य में बदलाव और हस्तांतरण की प्रक्रिया समझना जरूरी है। हर शेयर या बांड को आसानी से किसी दूसरे व्यक्ति को उपहार में देना संभव नहीं होता।
निवेश वाला उपहार देने से पहले जांचें नियम
शेयर या बांड उपहार में देने पर पाने वाले और देने वाले, दोनों के लिए कर संबंधी सवाल उठ सकते हैं। उपहार का मूल्य, संबंध और निवेश के प्रकार के अनुसार नियम बदल सकते हैं। इसलिए इसे कर बचाने का पक्का तरीका न मानें। पहले यह समझें कि उपहार कानूनी रूप से कैसे हस्तांतरित होगा और उसके बाद कोई कर देनदारी तो नहीं बनेगी।
त्योहारों पर उपहार देना खुशी बांटने का माध्यम है। लेकिन बजट से बाहर जाकर खर्च करना या केवल कर बचाने के लिए उपहार चुनना समझदारी नहीं है। अपनी क्षमता के अनुसार खर्च करें, जरूरी दस्तावेज संभालें और बड़े कारोबारी उपहारों पर विशेषज्ञ की सलाह लें। सही योजना से त्योहार की खुशी भी बनी रहेगी और वित्तीय अनुशासन भी।
(लेखिका जीएसटी और वित्तीय मामलों की विशेषज्ञ )
