वाराणसी, जेएनएन। अमेरिका में सुपर मेडिकल लेडी नाम से ख्यात व अमेरिकी सरकार की स्वास्थ्य सलाहकार डा.  रोजमेरी गिब्सन ने कहा कि चीन की सोच हमेशा से ही वैश्विक बाजार पर हावी होने की रही है। इसका दुष्परिणाम सामने है। चीन ने पूरी दुनिया को सांसत में डाल रखा है। आपदा की इस घड़ी में भारत का व्यवहार चीन से बेहतर रहा है। यही कारण है कि भारत की दुनिया भर में प्रशंसा हो रही है।

वह रविवार को डीएवी पीजी कालेज के दर्शनशास्त्र विभाग की ओर से आयोजित आपद धर्म: कोविड -19 में नैतिक शिक्षा विषयक दो दिनी अंतरराष्ट्रीय वेबिनार के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहीं थीं। उन्होंने कहा कि जब दुनिया में दवाओं की कमी थी तो भारत ने हाइड्राक्सीक्लोरोक्वीन का निर्यातकर आपद धर्म का सटीक उदाहरण पेश किया, जिसके लिए अमेरिका भारत का आभारी रहेगा। भारतीय संस्कृति व परंपरा आपदा काल के पहले से ही समृद्ध रही है। वहीं, चीन ने टेस्टिंग व रैपिड किट के नाम पर दुनिया को धोखा दिया। चीन को कोरोना महामारी में भी सिर्फ व्यापार दिख रहा है। कहा कि महामारी फैली तो अमेरिका तैयार नहीं था। अमेरिका ने हजारों नागरिकों को मरते देखा है और अब जोर कोरोना की वैक्सीन के अलावा टेस्टिंग किट व मास्क बनाने पर है।

धर्म व आपद धर्म एक-दूसरे से प्रतिबद्धता के साथ जुड़े

विशिष्ट वक्ता राज्यसभा सांसद व इंडियन काउंसिल ऑफ कल्चरल रिलेशंस के निदेशक डा. विनय सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि समाज में व्यक्तिगत विकास की भावना काफी तीव्र हो गई थी। दिखावटी शैली का प्रभाव ज्यादा था, जिस पर अब नियति ने ध्यान केंद्रित किया है। धर्म और आपद धर्म एक दूसरे से प्रतिबद्धता के साथ जुड़े हैं।

आइसीपीआर प्रमुख प्रो. आरसी सिन्हा ने कहा कि सनातन धर्म में पहली बार आपद धर्म की चर्चा भीष्म और युधिष्ठिर संवाद में हुई थी। किसी भी स्थिति में भूख से मरना भारतीय संस्कृति को मान्य नहीं है, चाहे वह आपदा का ही काल क्यों न हो।

चीन का व्यवहार आपद धर्म के बिल्कुल विपरीत

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (वर्धा) के कुलपति प्रो. रजनीश शुक्ल ने कहा कि नैतिकता का प्रश्न मनुष्य के विपत्ति काल में बदल नहीं सकता है। भारतीय सनातन संस्कृति व दर्शन का सिद्धांत इस बात की पुष्टि करता है कि मानव अस्तित्व को बचाने के लिए सामान्य नैतिकता का उल्लंघन भी न्यायोचित है। उन्होंने  कहा कि चीन का व्यवहार आपद धर्म के बिल्कुल विपरीत है। अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डा. सत्यदेव सिंह ने कहा कि आपदा काल ने सामान्य मानवीय जीवन को बदल दिया है। इस स्थिति में भारतीय दर्शन प्रासंगिक हो जाता है। आपदा काल में भारतीय दर्शन अनुसार राजा पर पूर्ण विश्वास रखना प्रजा का परम कर्तव्य है। वर्तमान में सरकार के नियमों का पालन करना ही प्रजा का कर्मयोग है।

वेबिनार में मुख्य रूप से स्वीडन के प्रो. अके सेंडर, जमैका के प्रो. एंटोनी सवराई राज, अमेरिका के प्रो. वंदना पुरकायस्था के अलावा प्रो. अजय वर्मा, प्रो. एचएस प्रसाद, प्रो. आरके झा, आइआइटी मुंबई के प्रो. विक्रम सिंह सिरोला सहित अन्य ने भी विचार व्यक्त किए। ई सोविनियर का विमोचन भी किया गया। स्वागत डा. रामेंद्र सिंह, संचालन डा. सतीश कुमार सिंह व धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त रूप से प्रबंधक अजीत सिंह यादव व डा. संजय कुमार सिंह ने किया।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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