वाराणसी/लखनऊ। पासपोर्ट अधीक्षक विकास मिश्रा के वाराणसी में तैनाती के दौरान मामलों की जांच के लिए सीबीआइ टीम ने वाराणसी में भी लखनऊ के अलावा कार्रवाई की है। भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुहिम के चलते लखनऊ में सीबीआइ ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई की। साल के पहले ही सप्ताह में आय से अधिक संपत्ति के मामले में पासपोर्ट अधीक्षक विकास मिश्रा पर शिकंजा कसा। सीबीआइ लखनऊ की एंटी करेप्शन शाखा ने लखनऊ पासपोर्ट आफिस में तैनात विकास मिश्रा के गोमतीनगर स्थित तीन आवासों समेत चार ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे मारे। इनमें वाराणसी का एक ठिकाना भी शामिल है। सीबीआइ ने विकास मिश्रा के आवासों से 12 लाख रुपये नकद, करीब 5.5 लाख रुपये के जेवर, 26 एफडीआर और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। विकास मिश्रा के 45 बैंक खातों व दो लॉकर की जानकारी भी मिली है।  

लखनऊ सीबीआइ ने एक दिन पूर्व पासपोर्ट अधीक्षक विकास मिश्रा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया था। बताया गया कि सीबीआइ ने अपनी इंटेलीजेंस से जुटाई जानकारियों के आधार पर यह कार्रवाई की है। सीबीआइ ने शनिवार को विकास मिश्रा के गोमतीनगर के विभव खंड व विजय खंड स्थित दो आवासों पर पहले छापा मारा। इसके बाद गोमतीनगर क्षेत्र में ही स्थित उनके एक अन्य मकान में भी छापेमारी की। वाराणसी स्थित पासपोर्ट कार्यालय में भी सीबीआइ ने छानबीन की। विकास मिश्रा लखनऊ से पूर्व वाराणसी में ही तैनात थे। एक जनवरी को ही वह वाराणसी से स्थानांतरित होकर लखनऊ आए थे। बताया गया कि विकास मिश्रा के वाराणसी में तैनात रहने के दौरान ही सीबीआइ की निगाहें उनकी गतिविधियों पर थीं। सीबीआइ लखनऊ की एंटी करेप्शन शाखा के एसपी राघवेन्द्र वत्स ने विकास मिश्रा के ठिकानों पर छापे की पुष्टि की है। उनका कहना है कि बैंक खातों के बारे में छानबीन कराई जा रही है। 

दर्जनों दुकानें पासपोर्ट बनवाने को लोगों को देती है सुविधाएं

पूर्वांचल के लोगों को पहले पासपोर्ट बनवाने के लिए लखनऊ की दौड़ लगानी होती थी। इसको देखते हुए विदेश मंत्रालय ने वाराणसी में वर्ष 2012 में महमूरगंज में पासपोर्ट सेवा केंद्र खोला गया। यहां पर प्रतिदिन सात सौ के करीब पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन आते हैं। पासपोर्ट कार्यालय के सामने कई दुकानें हैं जहां पर लिखा होता है पासपोर्ट बनवाने के लिए यहां पर कर सकते हैं आवेदन। यहां पर आप कुछ पैसा खर्च कर ऑन लाइन आवेदन कर सकते हैं। कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जो ठीके पर आवेदन कराते हैं। पासपोर्ट कार्यालय के अधिकारियों को जब इसकी जानकारी दी जाती है तो उनका एक ही जवाब होता था कि उनके पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है कि वह इस पर रोक लगा सके।

क्या है कार्य प्रणाली

जब कोई पासपोर्ट के लिए आवेदन करता है तो उसके दस्तावेजों की जांच-पड़ताल एक निजी कंपनी के लोग करते हैं। उसके बाद उसके कागजात विदेश मंत्रालय के अधीन कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियोंं के पास सत्यापन के लिए जाते हैं। वहां पर उनके मूल दस्तावेज देखे जाते है। इसके अलावा उनसे कुछ प्रश्न पूछे जाते है। अगर कहीं कोई समस्या आती है तो सहायक पासपोर्ट अधिकारी उसका निस्तारण करता है। पासपोर्ट जारी करने का अधिकार विदेश मंत्रालय के अधिकारी के पास रहता है। 

शुक्रवार की रात में अधिकारी चले जाते हैं

विदेश मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाले अधिकारी रविवार को रात में या सोमवार को सुबह पासपोर्ट कार्यालय आते हैं और शुक्रवार की रात में चले जाते हैं। पांच दिनों तक वह विभिन्न स्थानों पर रहते हैं। 

 

Posted By: Abhishek Sharma

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