वाराणसी सहित पूर्वांचल में हाईवे पर पशुओं की लाशें, कोहरे में चालकों पर खतरा
वाराणसी-गाजीपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर मृत और आवारा पशुओं की मौजूदगी चालकों व यात्रियों के लिए खतरा बन गई है, खासकर ...और पढ़ें

वाराणसी-गाजीपुर हाईवे पर आवारा पशुओं से खतरा: कोहरे में बढ़ सकती हैं दुर्घटनाएं।
HighLights
वाराणसी-गाजीपुर हाईवे पर मृत/आवारा पशु, यात्रियों को खतरा।
भीषण ठंड और कोहरे में बढ़ सकती हैं दुर्घटनाएं।
एनएचएआई व स्थानीय निकायों की सुरक्षा में कमी।
अरुण कुमार मिश्र, जागरण वाराणसी। वाराणसी-गाजीपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पशुओं की जिंदगी की कोई कीमत नहीं रह गई है। सड़क पर दौड़ते तेज रफ्तार वाहनों के बीच कहीं मृत पड़े पशु तो कहीं अचानक सामने आ जाते मवेशी। भीषण ठंड और कोहरे की शुरुआत अब कुछ सप्ताह की बात है।
इससे पहले गुरुवार को वाराणसी से गाजीपुर के बीच कई स्थानों पर पशु मृत अवस्था में सड़क पर पड़े दिखाई दिए। यह दृश्य केवल पशु सुरक्षा की बदहाली नहीं, बल्कि वाहन चालकों और यात्रियों की जिंदगी पर मंडराते खतरे की भी गवाही दे रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहन निर्धारित गति से फर्राटा भरते हैं।
इसी बीच सड़क के बीच और किनारे उगी घास चरने के लिए पशु पहुंच जा रहे हैं। सड़क किनारे बड़ी-बड़ी घास उगने से मवेशियों का जमावड़ा बढ़ने की आशंका है। अचानक सामने आए पशु को बचाने के प्रयास में चालक के वाहन से नियंत्रण खोने, दूसरे वाहनों से टकराने या वाहन पलटने जैसी घटनाएं हो सकती हैं। पीछे से आ रहे वाहनों के लिए भी अचानक ब्रेक लगाना हादसों का कारण बनता है।
पांच साल पहले ही खुली एनएचएआइ की पोल : वाराणसी रिंग रोड के हरहुआ से राजातालाब खंड (फेज-2, पैकेज-1) का आधिकारिक लोकार्पण 25 अक्टूबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया था। यह सड़क 16.98 किलोमीटर लंबी है। इस खंड के निर्माण की कुल अनुमानित लागत 1,011.3 करोड़ थी।
नियमों के तहत सुरक्षा की जिम्मेदारी
- राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षित यातायात तय करने के लिए सड़क सुरक्षा के मानकों का पालन जरूरी।
- एनएचएआइ को सड़क का रखरखाव, सुरक्षा संबंधी कमियों की पहचान व संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय जरूरी।
- संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग या उपयुक्त फेंसिंग, संकेतक, नियमित निरीक्षण और सड़क किनारे की घास की कटाई जैसे करें उपाय।
- वन्य जीवों को सड़क आरपार करने के लिए अंडरब्रिज समेत अन्य विकल्प की होनी चाहिए व्यवस्था।
- बेसहारा पशुओं को पकड़ने और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए स्थानीय निकायों तथा पशुपालन विभाग के साथ समन्वय जरूरी।
- हाईवे पर पशुओं की मौजूदगी वाले स्थान चिह्नित कर नियमित निगरानी, तत्काल रेस्पांस व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की तय करें जवाबदेही।
