वाराणसी, जेएनएन। सरकार द्वारा कैग को उच्च शिक्षण संस्थाओं के वित्तीय जांच के साथ अब शैक्षिक परफॉरमेंस ऑडिट का भी जिम्मा सौंपा गया है। कैग टीम प्रदेश में लखनऊ विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ सहित प्रदेश के 30 कॉलेजों में पिछले दो हफ्ते से फाइलें खंगाल रही है। इनमें शहरी क्षेत्र से श्रीअग्रसेन कन्या पीजी कॉलेज एवं ग्रामीण क्षेत्र से जगतपुर पीजी कॉलेज भी शामिल हैं।

कैग टीम कॉलेज की पिछले पांच साल में प्रवेश लेने वाली छात्रा संख्या, उनसे प्राप्त फीस, सरकारी गैर सरकारी प्राप्त अनुदान राशि, मूलभूत सुविधाएं, ऑफिस ऑटोमेशन एवं लाइब्रेरी ऑटोमेशन, आइटी इंफ्ररास्ट्रक्चर से संबंधित रिपोर्ट साक्ष्य के साथ जुटा रही है। कैग टीम जब बुधवार को अग्रसेन पीजी कॉलेज तीसरी बार पहुंची तो कालेज में हड़कंप मच गया। इसके पूर्व दो बार दौरा करने पर 70 पेज के विभिन्न जांच बिंदुओं को कॉलेज द्वारा गंभीरता पूर्वक न लेने पर टीम द्वारा कड़ाई से फाइलों की जांच पड़ताल शुरू की गई। मामला तब और गंभीर हो गया जब जांच टीम ने पूर्व में कैग द्वारा की गई जांच में 2 करोड़ 18 लाख के गबन की फाइल खंगालनी शुरू की। इस दौरान मीडिया ने प्रबंधक से मिलने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें लौटा दिया गया। वर्तमान प्रबंधन के तीन साल के कार्यकाल में इस तरह छात्राओं की संख्या घट जाना अग्रसेन की घटती लोकप्रियता की ओर इंगित करता है। नैक द्वारा अग्रसेन को पूर्व प्राचार्या डॉ कृष्णा निगम के कार्यकाल में सन 2005 में ए ग्रेड मिला था। 14 साल बीत जाने के बाद भी कॉलेज में नैक मूल्यांकन न होना कॉलेज की परफॉरमेंस पर प्रश्नचिन्ह है। वर्तमान प्रबंधन के कार्यकाल में जब विद्यापीठ ने छात्राओं की डिग्री पर रोक लगायी थी तो उन्होंने वीसी को एसएसआर जमा कर नैक करा लेने का आश्वासन दिया था। आनन-फानन में 30 दिसंबर 2018 को एसएसआर सबमिट कर डिग्री तो रिलीज करा ली गई। तब से लेकर अब तक एक साल बीतने को है, लेकिन अब तक नैक टीम के पहुंचने को लेकर कोई गुंजाइश नहीं दिख रही और न ही महाविद्यालय इस दिशा में कोई पहल कर रहा है।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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