वाराणसी, जेएनएन। पूर्व गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) धर्म निरपेक्षता के खिलाफ है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में हुए संशोधन के दौरान संविधान में सामाजिकता व संप्रदायिकता को लेकर जरूरी बिंदुओं को जोड़ा गया था। सीएए को लेकर संविधान के इन्हीं बिंदुओं की अनदेखी हुई है।

बनारस आगमन के दौरान खोजवां स्थित कांग्रेसी नेता मनीष उपाध्याय के आवास पर शुक्रवार को अनौपचारिक वार्ता में शिवराज पाटिल ने सीएए के मसले पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि देश की नागरिकता का हक देने के लिए किसी धर्म का नाम लेने की जरूरत क्या थी। जो लोग पात्र होते उनको दिया जाता। कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान जैसे देशों में मुस्लिमों को भी प्रताडि़त किया जाता है। ऐसे में उनकी अनदेखी कर सिर्फ कुछ धर्मों के लोगों को नागरिकता देना उचित नहीं है। कहा कि सीएए के विरोध में हो रहे प्रदर्शन में ङ्क्षहसा कौन कर रहा है जो बैठक कर प्रदर्शन कर रहे हैं या फिर बाहर के लोग, यह सरकार को तय करना होगा। कहा कि आंदोलन लंबे समय तक पूर्व में भी हुए हैं। इसमें रेलवे, टैक्सटाइल जगत का आंदोलन बड़ा उदाहरण है जो छह माह तक चले थे।

नहीं गए जनता के बीच, हार गए

उन्होंने कहा कि 1972 से कुल 11 बार चुनाव मैदान में उतरे। आखिरी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इसकी वजह है कि विपक्षी दल के समक्ष खुद की जीत सुनिश्चित मानकर जनता के बीच जाना कम हुआ था। इसलिए, कांग्रेस को भी बड़ी जीत के लिए जनता के बीच जाना होगा। कहा कि विपक्षियों का यह आरोप कि सिर्फ गांधी परिवार को ही अध्यक्ष बनाया जाता है, पूर्णत: निराधार है। कहा, इतिहास गवाह है कि कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर गैर गांधी परिवार के लोग भी लंबे समय तक पार्टी का नेतृत्व किए।

बोफोर्स को लेकर खूब गालियां मिलीं

शिवराज पाटिल ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के भाषण को नहीं सुना जिसको लेकर भाजपा को कड़ी आपत्ति हो रही है। कहा कि आपत्तिजनक बयानों को लेकर भाजपा पहले से मशहूर रही है। कभी पप्पू कहती है तो कभी कुछ और...। बोफोर्स की खरीद को लेकर भी विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री समेत सरकार के अन्य मंत्रियों को जमकर गालियां दी थीं जबकि उसी बोफोर्स तोप ने कारगिल युद्ध में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सिर पर जीत का सेहरा बांधा।

बीते पांच साल में विकास से इंकार नहीं

शिवराज पाटिल ने कहा कि बीते पांच साल में हुए विकास से इंकार नहीं किया जा सकता है लेकिन यह विकास कांग्रेस के 70 सालों की तुलना में अधिक है, यह भी सत्य नहीं है। कहा कि फिलहाल, पार्टी की मुख्यधारा से अलग हूं। हां, यह भी है कि यदि पार्टी को मेरी जरूरत महसूस हुई तो मैं सौंपी गई जिम्मेदारी को निष्ठा से निभाऊंगा। कहा कि राजनीति में युवाओं को तरजीह दी जाती है। जैसा कि कांग्रेस में दिया जा रहा है। इसे पुराने कांग्रेसियों को दरकिनार करने की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। खोजवां पहुंचने से पहले शिवराज पाटिल ने श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में मत्था टेका। इस दौरान कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, सीताराम केसरी आदि मौजूद थे।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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