वाराणसी, जेएनएन। इस समय साइबर ठग नए-नए तरीकों से जनता को ठगने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। लोगों के एकाउंट से पैसे कट जा रहे हैं और जब उनको इसका अंदाजा लग रहा है तब तक वह ठगी के शिकार हो चुके होते हैं। कई ऐसे एप्लीकेशंस भी आ चुके हैं जिनका प्रयोग ये ठगी के लिए कर रहे हैं। स्क्रीन शेयरिंग एप एनीडेक्स, क्विक सपोर्ट, एंड्रॉयड, टीम व्यूअर के बारे में आपने सुना ही होगा। अब साइबर अपराधी इन एप्स का दुरुपयोग कर लोगों के साथ ठगी कर रहे हैं। इनके माध्यम से साइबर फ्रॉड करने वाले दूर से ही लोगों की डिवाइस को कंट्रोल करके  उनका सारा डाटा चुरा लेते हैं। अनजाने में ही सही लोग खुद कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिससे ठग उन्हें आसानी से अपना शिकार बना लेते हैं।

स्क्रीन शेयरिंग एप इस्तेमाल करने में सावधानी बरतें

टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट विजय गुप्ता बताते हैं स्क्रीन शेयरिंग एप इस्तेमाल करने में सावधानी बरतें। अगर कोई अनजान व्यक्ति स्क्रीन शेयरिंग एप इंस्टाल करने को कहता है तो कभी न करें और न कभी अपने स्क्रीन शेयरिंग का पॉसवर्ड किसी अनजान व्यक्ति को दें।

न बातों का रखें ध्यान

टीम व्यूअर स्क्रीन शेयरिंग एप्लीकेशन है लेकिन साइबर ठग इस वक्त इनका भी इस्तेमाल करने लगे हैं। अगर कोई आपसे लिंक के जरिए यह ऐप डाउनलोड करने को कहता है तो कभी भी जल्दबाजी में ऐसा न करें। क्योंकि जैसे ही आप इसे डाउनलोड करेंगे साइबर ठग आपके डिवाइस में टीम व्यूअर सॉफ्टवेयर या ऐप डाउनलोड कर आपके डिवाइस को एक्सेस कर लेते  है। इससे आपकी सारी जानकारी उनके पास आसानी से आ जाएगी।

 एंड्रॉयड भी एक ऐसा ही एप्लीकेशन है जिसकी मदद से स्मार्टफोन या टैबलेट को विंडोज मैक, लिनक्स की मदद से यूजर के डिवाइस को आसानी से हैकर्स हैक कर ले रहे हैं। हैकर्स यूजर को एक एप्लीकेशन अपने  डिवाइस में डाउनलोड करने के लिए जाल बिछाते हैं। जैसे ही यह डाउनलोड हो जाता है हैकर्स दूर बैठे ही डिवाइस को कंट्रोल कर लेते हैं ।  इसी प्रकार एनीडेस्क रिमोट डेस्कटॉप सॉफ्टवेयर है जिसकी मदद से दूर बैठे हुए भी दूसरी डिवाइस को कंट्रोल किया जा सकता है।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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