वाराणसी में रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर की संभावनाओं पर मंथन, विकास की रफ्तार के साथ विरासत को बचाने पर जोर
वाराणसी में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित 'वाराणसी राइजिंग समिट' में शहर के रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और भविष्य ...और पढ़ें

वाराणसी के विकास पर मंथन: इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और विरासत संरक्षण पर जोर।
HighLights
ICC ने 'वाराणसी राइजिंग समिट' में विकास संभावनाओं पर चर्चा की।
रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और भविष्य की शहरी जरूरतों पर मंथन हुआ।
तेजी से विकास के साथ काशी की विरासत बचाना भी जरूरी है।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी के बदलते स्वरूप, रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के साथ भविष्य की शहरी जरूरतों को लेकर विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने मंथन किया। इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) की ओर से होटल ताज में आयोजित ‘वाराणसी राइजिंग समिट – इंफ्रास्ट्रक्चर, इन्वेस्टमेंट, इम्पैक्ट’ में शहर के विकास, निवेश, आवास, हॉस्पिटैलिटी, कनेक्टिविटी और विरासत संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
समिट के दौरान इस बात पर चर्चा हुई कि वाराणसी में तेजी से हो रहे शहरी विकास को किस तरह बेहतर टाउन प्लानिंग, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। साथ ही, शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए आधुनिक सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से स्वागत संबोधन के बाद एनारॉक के ग्रुप वाइस चेयरमैन संतोष कुमार ने नॉलेज पार्टनर के तौर पर अपने विचार रखे। इसके बाद आईटीएस इंडिया के प्रेसिडेंट और रोड सेफ्टी एंबेसडर-आईआरएफ अखिलेश श्रीवास्तव ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर मुख्य वक्तव्य दिया। वाराणसी डिवीजन के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार (आईएएस) ने विशेष संबोधन किया, जबकि आर्क ग्रुप के चेयरमैन ऋषभ चंद्र जैन ने इंडस्ट्री एड्रेस दिया। वाराणसी डिवीजन के कमिश्नर एस. राजालिंगम (आईएएस) ने मुख्य अतिथि के तौर पर विशेष संबोधन किया।
समिट के पहले पैनल डिस्कशन में ‘फ्रॉम हेरिटेज टू हाई ग्रोथ: रियल एस्टेट रोल इन शेपिंग काशी’ विषय पर चर्चा हुई। इसमें वाराणसी में रियल एस्टेट के विकास में पब्लिक-प्राइवेट सहयोग, नीतिगत और नियामकीय पहल, बेहतर कनेक्टिविटी और भविष्य के लिए तैयार शहरी क्षेत्रों के विकास के साथ आवास की बढ़ती मांग और आवासीय रियल एस्टेट के बदलते रुझानों पर चर्चा की गई। इस सत्र का संचालन एनारॉक के ग्रुप वाइस चेयरमैन संतोष कुमार ने किया।
दूसरे पैनल में ‘काशी स्पिरिचुअल इकॉनमी: बिल्डिंग हॉस्पिटलिटी फॉर द नेक्स्ट डिकेड’ विषय पर चर्चा हुई। इसमें वाराणसी में गुणवत्तापूर्ण होटल, सर्विस्ड स्टे और अन्य आवास विकल्पों की मांग, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने में हॉस्पिटैलिटी की भूमिका तथा इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और लास्ट-माइल मोबिलिटी जैसे मुद्दों पर विचार किया गया। इस चर्चा में एकोर ग्रुप, सफ़रनामा हॉस्पिटैलिटी, आईटीसी होटल्स, ज़ोन बाय पार्क और BNI वाराणसी से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
तीसरे पैनल में ‘फ्रॉम हेरिटेज सिटी तू फ्यूचर सिटी: डिजाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर ग्रोथ, मोबिलिटी एंड लिवाबिलिटी’ विषय पर शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर और भविष्य की जरूरतों पर चर्चा हुई। इसमें वाराणसी के विकास और रहने योग्य शहर बनाने में सामने आ रही इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी जरूरतों, एकीकृत टाउन प्लानिंग, ट्रैफिक प्रबंधन, मोबिलिटी, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी और विरासत संरक्षण के साथ आधुनिक विकास के संतुलन पर विचार किया गया।
इस सत्र में वाराणसी नगर निगम, वाराणसी विकास से जुड़े अधिकारियों, एनएचएआई, नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड, एयरपोर्ट अथॉरिटी, आईआईटी-बीएचयू और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए।
कार्यक्रम में आर्किटेक्ट एवं आर्क ग्रुप के चेयरमैन ऋषभ चंद्र जैन ने कहा कि वाराणसी के विकास के साथ इसकी प्राचीन विरासत, पुरानी गलियों और ऐतिहासिक भवनों को बचाना भी जरूरी है। इसके लिए सरकार, प्रशासन, स्थानीय लोगों और उद्योग जगत को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि पुरानी गलियों में बढ़ती भीड़ और जाम को देखते हुए साड़ी, सोने-चांदी और अन्य पारंपरिक कारोबार के लिए शहर के बाहरी हिस्सों में बेहतर सुविधाओं वाले क्लस्टर विकसित किए जा सकते हैं। पुराने दुकानदारों को केवल मुआवजा देकर दूसरी जगह भेजने के बजाय उनके कारोबार को ध्यान में रखकर पूरी योजना तैयार करने की जरूरत है, ताकि आधुनिक विकास के साथ वाराणसी की प्राचीन पहचान और विरासत भी सुरक्षित रहे।
