वाराणसी, जेएनएन। गोवा की राज्यपाल म़ृदुला सिन्हा सोमवार को बनारस में संपूर्णानंद संस्‍कृत विश्‍वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के सिलसिले में पहुंची हैं। गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने कहा कि देश में बिजली, चौड़ी सड़क सहित अन्य भौतिक विकास जरूरी है। भौतिक विकास के संग भारतीय संस्कृति का भी विकास बेहद जरूरी है। वह सोमवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में अभिनव प्रकाशनों के विमोचन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहीं थी। इससे पूर्व सुबह उन्‍हाेने काशी विश्‍वनाथ स्थित बाबा दरबार में दर्शन पूजन किया। बाबा दरबार में उनको मंदिर प्रशासन की ओर से प्रसाद भी दिया गया।

संस्‍कृत विश्‍वविद्यालय में उन्होंने कहा कि चारों आश्रम में गृहस्थ आश्रम बेहद महत्वपूर्ण है। दु:ख की बात यह कि वर्तमान में परिवार टूट रहे हैं। ऐसे में नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से बांधे रखने की जरूरत है। कहा कि दुनिया के सारे ज्ञान भारतीय संस्कृति में ही समाहित हैै। कथा व वेदमंत्रों के श्रवण से हमें सुखद अनुभूति मिलती है। मन प्रफुल्लित होता है। आनंद का अनुभव होता है।

इसी प्रकार गंगा मां के स्पर्श मात्र से सुख की अनुभूति होती है। शीतलता मिलती है। कहा कि भारतीय संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखने में लोक संस्कृति, लोकगीत, लोक कथाओं का श्रेय है। हमारे देश में लोक संस्कृति, लोकगीत, लोक कथाएं वेदों पर ही आधारित है। ऐसे में भोजपुरी, मैथली, अवधि सहित अन्य भाषाओं में लोकगीत के माध्यम से वेदों को घर-घर पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। यही कारण है कि हमारी भारतीय संस्कृति मिटने वाली नहीं हैं। कहा कि वेद मंत्रों से हमें सुख व शांति मिलती है। भारत की धरती में जन्म मिलना सौभाग्य की बात है। कहा कि वर्तमान में पुन: भारतीयता की ओर जाने की पहल तेज हो गई है। यह हम सभी के लिए सकारात्मक पहलू है। भारतीय संस्कृति के संजोये बिना हमारा विकास अधूरा है।   

अध्यक्षता कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल, स्वागत प्रकाशन निदेशक डा. पद्माकर मिश्र, संचालन संयुक्त रूप से प्रति कुलपति प्रो. हेतराम कछवाह व प्रो. रमेश प्रसाद द्विवेदी तथा धन्यवाद ज्ञापन पूर्व कुलपति प्रो. गंगाधर पंडा ने किया। इस मौके पर राज्यपाल के पति राम कूपालू सिन्हा, कुलसचिव राज बहादुर सहित अन्य लोग उपस्थित थे। 

चार ग्रंथों का किया विमोचन 

राज्यपाल ने डा. दिनेश कुमार गर्ग की पुस्तक 'चाणक्यनीति शास्त्र समुच्चय:' प्रो. जानकी प्रसाद द्विवेदी की 'कातकत्रीय सूत्रों की हैम प्रकृत पालिकच्चायन' (सूत्रों के साथ समीक्षा), कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल की 'न्याय सिद्धांत मुक्तावली' तथा प्रो. नागेंद्र पांडेय की 'बृहत्संहिता' (चतुर्थ भाग) नामक पुस्तक का विमोचन किया। 

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Posted By: Abhishek Sharma

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