वाराणसी, जेएनएन। बीते सितंबर माह में गंगा में बाढ़ से खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने गंगा में नाव संचालन पर रोक लगा दी गई थी। हर प्रकार की छोटी-बड़ी नाव को रोक दिया गया था। जलस्तर घट तो रहा है लेकिन सोमवार को 65.32 मीटर रहा। घाटों की सीढि़यां डूबी हुई हैं। जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह की तरफ से पानी के घटने के बाद नावों के संचालन के लिए कोई आदेश नहीं दिया गया। इसके बावजूद पर्यटकों की जान जोखिम में डाल कर गंगा में नावों का संचालन शुरू कर दिया गया है। पानी का जलस्तर अधिक होने और तेज बहाव की वजह से बाढ़ के दौरान हादसा होने का खतरा बना रहता है। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन ने रोक लगाई थी। कई होटलों ने विदेशी पर्यटक समूहों ने नौका विहार को पूर्व में कार्यक्रम तय किया था।

जब नियत तिथि पर देसी-विदेशी पर्यटक आए तो होटल संचालकों ने अनुमति भी मांगी। प्रशासन ने कोई रिस्क नहीं लेने का हवाला देते हुए अनुमति नहीं दी। गंगा में सुरक्षा के मद्देनजर एनडीआरएफ और पीएसी जिम्मेदारी दी गई थी। अब सभी सुरक्षा मानक को दरकिनार कर संचालन शुरू कर दिया गया है। नाव को लाइसेंस देने और उसके संचालन पर निगरानी रखने वाले नगर निगम ने घटते जलस्तर के बाद कोई ध्यान नहीं रखा। यह भी नहीं देखा कि जिला प्रशासन की तरफ से संचालन पर रोक हटाई गई या नहीं। तेज धार में नावों को पूरी तरह से भर कर संचालित किया जा रहा है। नावों पर लाइफ जैकेट और अन्य सुरक्षा उपकरण भी नहीं रखे गए हैं।

- नावों के संचालन पर हम बाढ़ के दौरान रोक की एडवाइजरी जारी किए थे। उसी के तहत संचालन रोक दिया गया था। जब पानी घट जाता है तो पुन: नाव संचालन करने का निर्देश नाव का लाइसेंस जारी करने वाला नगर निगम जल आयोग से सलाह लेकर नाविकों को देता है। हमने संचालन का कोई आदेश नहीं दिया है। -सतीश कुमार, आपदा राहत अधिकारी, एडीएम एफआर।

- एक टीम भेज कर जांच की जाएगी कि क्या घटे जलस्तर और नदी के बहाव की जो स्थिति है उसमें नाव का संचालन किया जा सकता है या नहीं। उसके बाद ही निर्णय लिया जाएगा कि नावों का संचालन हो। -सुरेंद्र सिंह, जिलाधिकारी।

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