जागरण संवाददाता, वाराणसी : सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा वापस नहीं लेने पर पीड़िता को धमकाने, लूटपाट और उसकी हत्या का प्रयास करने के मामले में गिरफ्तार चर्चित विधायक विजय मिश्रा के भतीजे ब्लाक प्रमुख डीघ मनीष मिश्रा को पुलिस ने बुधवार को कड़ी सुरक्षा घेरेबंदी में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) निधि पांडेय की अदालत में पेश किया। अदालत द्वारा न्यायिक रिमांड मंजूर होने के बाद पुलिस मनीष मिश्रा को लेकर जेल चली गई। इसी प्रकरण में आगरा जेल से लाकर पुलिस ने गत दो दिसंबर को विधायक विजय मिश्रा को अदालत में पेश किया था। मनीष को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार किया था।

जैतपुरा निवासी युवती ने विजय मिश्रा व अन्य के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा गोपीगंज थाना में दर्ज कराया था। पीड़िता ने बीते 13 सितंबर को जैतपुरा थाने में विजय मिश्रा, उनके बेटे विष्णु मिश्रा, बेटी रीमा पांडेय, सीमा पांडेय, गरिमा तिवारी, भतीजे सतीश मिश्रा, मनीष मिश्रा समेत 13 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया। आरोप लगाया कि ये लोग उसके द्वारा गोपीगंज थाना में दर्ज कराए गए मुकदमे में बयान बदलने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं। जेल में बंद विजय मिश्रा की बेटी, दामाद, भतीजे कुछ अवांछनीय लोगों को लेकर उसके घर में घुस आए और अपशब्द बोलते हुए उसे सुलह करने के लिए धमकी देने लगे। विजय मिश्रा की ताकत का हवाला देकर सुलह नहीं करने पर सूर्यमणि सिपाही की भांति उसकी भी हत्या कराने जैसा अंजाम भुगतने की धमकी दे रहे थे। जब उसने विरोध किया तो सबों ने उसका मोबाइल छीन लिया और मारपीट करते हुए उसकी हत्या का प्रयास किया। शोरगुल होने पर उसे धमकाते हुए अपनी गाड़ी में बैठकर चले गए। मामले में विजय मिश्रा की बेटी रीमा पांडेय, गरिमा तिवारी, दामाद राज दूबे, रतन मिश्रा उर्फ गुड्डू, नाती विकास मिश्रा समेत दस आरोपितों की ओर से अग्रिम जमानत के लिए जिला जज की अदालत में प्रार्थना पत्र दायर किया गया था। जिला जज डा.अजय कृष्ण विश्वेश ने 22 नवंबर को अग्रिम जमानत अर्जी को निरस्त कर दिया था।

Edited By: Saurabh Chakravarty