वाराणसी [सौरभ चक्रवर्ती]। Birth Anniversary Shachindranath Sanyal (जन्म: 3 जून, 1893, निधन : 7 फरवरी 1942) भारत के स्वतंत्रता संग्राम में 1922 का वर्ष युवाओं के लिए बेहद आक्रोश वाला रहा। इसी वर्ष महात्मा गांधी ने चौरी चौरा कांड के बाद असहयोग आंदोलन वापस ले लिया था। इससे उपजी निराशा को बनारस के शचींद्रनाथ सान्याल और उनकी पार्टी हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन ने दिशा दी। इन युवाओं में भगत सिंह भी थे।

एसोसिएशन के सदस्य बने शहीदे आजम

असहयोग आंदोलन वापस होने के बाद भगत सिंह जैसे युवाओं को लगने लगा कि आजादी के लिए अहिंसा का रास्ता काम नहीं आएगा। इसके बाद 1924 में भगत ने सान्याल के हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की सदस्यता ग्रहण की। इसी के माध्यम से उनकी मुलाकात चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुखदेव, राम प्रसाद बिस्मिल आदि क्रांतिकारियों से हुई थी। बाद में इसी संगठन का नाम हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन कर दिया गया।

भगत सिंह दुविधा में फंसे तो सान्याल ने सुझाई राह 

भगत सिंह के जीवन में एक कठिन मोड़ तब आया था जब उनका परिवार शादी के लिए पीछे पड़ गया। परिस्थिति कुछ ऐसी बनी कि उनको कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था। ऐसे में उनको ख्याल आया बनारस के शचींद्रनाथ सान्याल का। उन्होंने पत्र लिखकर मार्ग प्रशस्त करने की गुजारिश की। जवाब में सान्याल ने लिखा, विवाह करना या न करना तुम्हारी इच्छा पर है। लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि शादी के बाद देश के लिए बड़ा काम करना तुम्हारे लिए संभव नहीं होगा। पारिवारिक बंधन धीरे-धीरे तुम्हें इतना जकड़ लेगा कि देशभक्ति से बहुत दूर हो जाओगे। यदि तुमने खुद को देश के लिए समर्पित कर दिया है तो विवाह के बंधन को अस्वीकार कर दो। ऐसे में विवाह करना देशद्रोह के समान है। संभव है कि इस बार मना करने के बाद परिवार वाले आगे भी तुम पर दबाव डालते रहेंगे। इसलिए तुम घर-परिवार छोड़ दो। यदि तुम्हें यह स्वीकार है तो मैं तुम्हारा मार्गदर्शन कर सकता हूं। शचीन्द्रनाथ के इस पत्र ने भगत सिंह की दुविधा दूर कर दी।

20 साल जेल में गुजार दिए 

पंद्रह साल में क्रांति के लिए इन्होंने बंगाल की अनुशीलन समिति का शाखा की स्थापना काशी में की। शचींद्रनाथ सान्याल ने देश के लिए अपने जीवन के 20 साल ब्रिटिश जेलों में गुजार दिए। वे पोर्ट ब्लेयर के सेलुलर जेल में भी रहे। बंगीय समाज के सचिव देवाशीष दास बताते हैं कि बंगाली टोला स्कूल व क्वींस कॉलेज ने उनके विचारों को आकार देने में बहुत सहायता की। उनके तीनों भाइयों ने भी आजादी की लड़ाई में अपना जीवन लगा दिया।

Posted By: Saurabh Chakravarty

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस