आईआईवीआर में जीन-एडिटिंग शोध पर जैव-सुरक्षा समिति का मंथन, रोग प्रतिरोधक किस्मों के विकास का रास्ता खुलेगा
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) में जैव-सुरक्षा समिति की बैठक हुई, जिसमें ट्रांसजेनिक और जीनोम-एडिटिंग कार्यक्रमों का तकनीकी मूल्यांकन किया ...और पढ़ें

आईआईवीआर में जैव-सुरक्षा समिति ने ट्रांसजेनिक और जीनोम एडिटिंग शोध की समीक्षा की।
HighLights
आईआईवीआर में जैव-सुरक्षा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई।
ट्रांसजेनिक और जीनोम-एडिटिंग कार्यक्रमों का तकनीकी मूल्यांकन किया गया।
रोग प्रतिरोधी किस्मों के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) में जैव-सुरक्षा समिति (आईबीएससी) की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य संस्थान में चल रहे ट्रांसजेनिक और जीनोम-एडिटिंग कार्यक्रमों का तकनीकी मूल्यांकन करना था।
इस बैठक में मूल्यांकन टीम का नेतृत्व काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमेरिटस डॉ. एल सी राय ने किया। टीम में हेरिटेज अस्पताल, वाराणसी के बायोसेफ्टी ऑफिसर डॉ. आई बी मिश्रा और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान के प्रोफेसर बिरिंची कुमार शर्मा बाह्य विशेषज्ञ के रूप में शामिल रहे।
आईबीएससी के अध्यक्ष और संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान में चल रहे ट्रांसजेनिक और जीन-एडिटिंग कार्यों का अवलोकन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि संस्थान ने ट्रांसजेनिक और जीनोम-एडिटिंग कार्यक्रमों के लिए बीएसएल-3 लेबोरेटरी के साथ-साथ कई हाई-टेक पॉलीहाउस और ग्लासहाउस स्थापित किए हैं। इसके बाद विशेषज्ञ सदस्यों ने इन सुविधाओं का निरीक्षण किया।
आईआईवीआर के जीन-एडिटिंग कार्यक्रम के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. अच्युत सिंह ने विभिन्न सब्जी फसलों में चल रहे कार्यों, विशिष्ट जीनों पर शोध और ट्रांसजेनिक पौधों के विकास पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि टमाटर, बैगन, मिर्च आदि में रोग प्रतिरोध बढ़ाने और खाद्य गुणवत्ता को सुधारने के लिए जीनोम एडिटिंग कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिसमें 12 से अधिक वैज्ञानिक लगे हुए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि परवल, सतपुटिया और सेम जैसी कई सब्जी फसलों का पूर्ण जीनोम अनुक्रमण पूरा हो चुका है और डेटा का विश्लेषण जारी है।
विशेषज्ञों प्रोफेसर एल सी राय और प्रोफेसर बिरिंची शर्मा ने संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ पौध-सूक्ष्मजीव अंतःक्रिया तंत्र और अन्य तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में डॉ. ए एन सिंह (प्रमुख, फसल सुरक्षा प्रभाग), डॉ. डी पी सिंह (प्रधान वैज्ञानिक एवं कार्यवाहक प्रमुख, फसल सुधार प्रभाग), डॉ. जगेश तिवारी, डॉ. शैलेश तिवारी, डॉ. श्वेता कुमारी, डॉ. आशुतोष राय और डॉ. विद्यासागर उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में आईबीएससी के अध्यक्ष एवं विशेषज्ञ सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इस बैठक ने ट्रांसजेनिक और जीन-एडिटिंग अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की दिशा में एक नया कदम उठाया है, जिससे रोग प्रतिरोधक किस्मों के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। आईआईवीआर में आयोजित इस बैठक ने न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने का कार्य किया है, बल्कि कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार भी खोले हैं।
