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बीएचयू के विज्ञानियों ने खोजा गेहूं के पौधे को राेग और तनाव प्रतिरोधी बनाने वाला बैक्टीरिया

By Shailesh Asthana Edited By: Abhishek sharma
Published: Thu, 03 Sep 2026 10:56 AM (IST)

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विज्ञानियों ने एक लाभकारी बैक्टीरिया की खोज की है, जो गेहूं के पौधों को रोग और ...और पढ़ें

बीएचयू के विज्ञानियों ने खोजा गेहूं को रोग और तनाव से बचाने वाला चमत्कारी बैक्टीरिया।

बीएचयू के विज्ञानियों ने खोजा गेहूं को रोग और तनाव से बचाने वाला चमत्कारी बैक्टीरिया।

HighLights

  1. बीएचयू ने गेहूं के पौधों के लिए लाभकारी बैक्टीरिया खोजा।

  2. यह बैक्टीरिया रोग और प्रतिस्पर्धात्मक तनाव से बचाता है।

  3. शोध 'फिजियोलाजिकल एंड मालिक्यूलर प्लांट पैथोलाजी' में प्रकाशित।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के विज्ञानियों ने एक महत्वपूर्ण अध्ययन किया है। इसमें पाया गया है कि मिट्टी में पाए जाने वाले लाभकारी बैक्टीरिया गेहूं के पौधों को रोग और आपसी प्रतिस्पर्धा से उत्पन्न तनाव का सामना करने में अधिक सक्षम बना सकते हैं। शोधकर्ताओं ने पौध वृद्धि को बढ़ाने वाले जड़-क्षेत्रीय लाभकारी बैक्टीरिया, जिन्हें पीजीपीआर में से विशेष रूप से बैसिलस अमाइलोलिक्वेफेशियन्स का उपयोग किया।

पहले गेहूं के पौधों को बाइपोलैरिस सोरोकिनियाना नामक फफूंद से संक्रमित किया गया, जिससे गेहूं में स्पाट ब्लाच रोग होता है। साथ ही गेहूं को अलग-अलग पौध घनत्व पर उगाया गया। इससे पौधों में अलग-अलग स्तर का आपसी प्रतिस्पर्धात्मक तनाव उत्पन्न हुआ। क्योंकि जब पौधे अधिक संख्या में एक-दूसरे के करीब उगते हैं, तो उन्हें प्रकाश, पानी, पोषक तत्वों और स्थान के लिए अधिक प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है।

इससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है और उन पर अतिरिक्त तनाव पड़ता है। अध्ययन में पाया गया कि इस बढ़ते प्रतिस्पर्धात्मक तनाव के बावजूद लाभकारी बैक्टीरिया से उपचारित गेहूं के पौधों ने बिना उपचार वाले पौधों की तुलना में बेहतर वृद्धि दिखाई।

डा. प्रशांत सिंह के नेतृत्व में हुआ यह शोध एल्सेवियर अमेरिका द्वारा प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्यू-वन (क्यू-१) वैज्ञानिक पत्रिका ‘फिजियोलाजिकल एंड मालिक्यूलर प्लांट पैथोलाजी’ में प्रकाशित हुआ है। शोध में बंडाना देवी, निधि यादव और नंदिता दुबे भी शामिल हैं। यह अध्ययन बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों और अनेक प्रकार के तनावों के बीच फसलों की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

डा. सिंह ने बताया कि लाभकारी बैक्टीरिया पौधे की रक्षा प्रणाली को हर समय सक्रिय नहीं रखते। इसके बजाय वे पौधे की रक्षा प्रणाली को रोग के संभावित हमले के लिए पहले से तैयार कर देते हैं। जब रोगजनक पौधे पर हमला करता है, तो तैयार पौधा तेजी से और अधिक प्रभावी ढंग से अपनी रक्षा प्रणाली को सक्रिय करता है। इससे पौधा वृद्धि और रक्षा के बीच बेहतर संतुलन बना पाता है और अनावश्यक रूप से ऊर्जा खर्च नहीं करता।