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बीएचयू के डाक्टरों ने गंभीर सिर की चोट से जूझ रही मां और प्रीमैच्योर बच्चे की बचाई जान

By Sangram Singh Edited By: Abhishek sharma
Published: Wed, 23 Sep 2026 01:13 PM (IST)

बीएचयू के ट्रामा सेंटर में डॉक्टरों ने एक गर्भवती महिला को गंभीर सिर की चोट से बचाया और आईसीयू में ...और पढ़ें

बीएचयू के डॉक्टरों ने गंभीर सिर की चोट से जूझ रही मां और प्रीमैच्योर बच्चे को दिया नया जीवन।

बीएचयू के डॉक्टरों ने गंभीर सिर की चोट से जूझ रही मां और प्रीमैच्योर बच्चे को दिया नया जीवन।

HighLights

  1. गर्भवती महिला को बाइक दुर्घटना में गंभीर सिर की चोट लगी।

  2. डॉक्टरों ने सफल सर्जरी और आईसीयू में प्रसव कराया।

  3. प्रीमैच्योर शिशु और मां दोनों की जान बचाई गई।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। बीएचयू के ट्रामा सेंटर एवं सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल में चिकित्सकों की सतर्कता और बहुविषयक समन्वय का बेहतर मामला सामने आया है। गंभीर सिर की चोट और बड़ी न्यूरोसर्जरी से गुजर रही एक गर्भवती महिला का न केवल सफल इलाज किया गया, बल्कि कई सप्ताह बाद आइसीयू में ही हुए अचानक प्रसव के दौरान लगभग 1.25 किलोग्राम के प्रीमैच्योर नवजात को भी नया जीवन दिया गया।

जून 2026 में मोटर साइकिल दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल गर्भवती महिला को ट्रामा सेंटर लाया गया था, जहां जांच में मस्तिष्क में गंभीर चोट (एक्यूट सबड्यूरल हेमेटोमा) पाई गई। डाक्टरों ने डिकम्प्रेसिव क्रेनिएक्टामी सर्जरी की और मरीज को लंबे समय तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ा। एक तरफ जहां गंभीर रूप से घायल मां की श्वसन और मस्तिष्क की स्थिति संभालनी थी, वहीं गर्भ में पल रहे शिशु की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी थी।

लगातार हफ्तों की गहन देखभाल के बाद 16 सितंबर को मरीज की स्थिति में सुधार हो रहा था, तभी अचानक प्रसव प्रक्रिया शुरू हो गई। स्थिति इतनी गंभीर थी कि सामान्य प्रसूति वार्ड में ले जाने का समय नहीं था। आइसीयू में ही महिला ने समय से पूर्व शिशु को जन्म दिया। जन्म के तुरंत बाद नवजात को सांस लेने में परेशानी हो रही थी, जिसे पहले स्थिर किया और बाद में एनआइसीयू में स्थानांतरित किया गया।

प्रसव के दौरान और उसके बाद मां की स्थिति पर भी नजर रखी गई। समय पर रक्त चढ़ाने और उचित देखभाल के चलते मां की हालत भी अब स्थिर है। टीम में बाल रोग विभाग के प्रो. सुनील कुमार राव और एनेस्थीसिया विभाग की प्रो. कविता मीना, डा. रजनीश, डा. अदिति प्रिया और डा. शिवाकांत समेत कई कर्मचारी शामिल रहे। डाक्टरों की त्वरित निर्णय क्षमता और बेहतरीन टीमवर्क ने इस बेहद जटिल मामले में मां और बच्चे दोनों की जान बचाने में सफलता हासिल की है।