वाराणसी, जेएनएन। किसानों को मिश्रित खेती करके दोगुनी आमदनी करनी हो तो उसके लिए सबसे कारगर मधुमक्खी पालन होगा। इसी खेती की बदौलत देश के दक्षिणी राज्यों के किसानों की आय काफी बढ़ी है। समृद्धि में पंजाब के किसान भी शमिल हैं। इसी को देखते हुए आइआइवीआर ने समेकित मधुमक्खी पालन योजना के जरिए वाराणसी समेत समूचे पूर्वांचल के किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास में जुटा है। 

मधुमक्खी पालन पर जोर 

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान पूर्वांचल के किसानों को पारंपरिक खेती में मधुमक्खी पालन कराने के प्रयास में जुटा हुआ है। इसके लिए सरकार की योजनाओं से किसानों को रूबरू कराया जा रहा है। आगामी वर्षों में किसानों का मधुमक्खी पालन की ओर झुकाव हुआ तो मधुक्रांति तो आएगी ही किसानों की आय भी काफी बढ़ेगी।

क्या-क्या होता है निर्माण

मधुमक्खी पालन से शहद, मोम, पालेन, रायल जेली, प्रोपलिस एवं परागकण के औषधीय एवं आर्थिक लाभ हैं। इससे दलहनों, तिलहनों सब्जीवर्गीय फसलों के उत्पादन व गुणवत्ता में भी वृद्धि होती है। 80 से 90 फीसद फसलों में परागण मधुमक्खियों द्वारा ही होता है।

पश्चिम के किसान आए आगे 

वाराणसी में चिरईगांव व बाबतपुर के एकाध किसान मधुमक्खी पालन की ओर ध्यान दिए लेकिन, प्रदेश में इलाबाहाद, बाराबंकी, मेरठ और सहारनपुर के किसान मधमक्खी पालन से काफी लाभ कमा रहे हैं। आइआइवीआर के अधिकारियों का मानना है कि काशी समेत पूर्वांचल के किसान पारंपरिक खेती से मधुमक्खी पालन को जोड़े तो उन्हें दोगुना लाभ होगा। 

किफायती होगा मधुमक्खी पालन 

मधुमक्खी पालन खेत के मेढ़ों, बगीचों में आसानी से किया जा सकता है। मात्र 2500 सौ रुपये खर्च में मधु से किसान हर साल 9-10 हजार रुपये की कमाई कर रहे हैं। सरकार किसानों को बाजार भी उपलब्ध कराने की तैयारी में है, जिससे मधु को देश और इसके बाहर आसानी से भेजा जा सके।

बोले अधिकारी 

मधुमक्खी पालन ग्रामीणों, किसानों एवं युवाओं के लिये रोजगार एवं आय के सृजन का कृषि उद्यम है। किसान परंपरा से हटे तो मधुमक्खी पालन समृद्धि का सबसे सहज तरीका होगा।

- डा. केके पांडेय, कार्यकारी विभागाध्यक्ष, पादप सुरक्षा विभाग, आइआइवीआर।

 

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Posted By: Vandana Singh