वाराणसी, जेएनएन। एक छोटी सी चूक और जिंदगी में कभी न भुलाने वाला गम ...। जी, हां एलपीजी (लिक्वीफाइड पेट्रोलियम गैस) सिलिंडर में लगने वाली आग की सच्चाई यही है। सिलेंडर की सुविधा लेने में सतर्कता को हथियार बनाएं तो चिंगारी शोला नहीं बन सकेगी। मऊ की हृदय विदारक घटना में 13 लोगों की हुई अकाल मौत ने सबको हिलाकर रख दिया है। दैनिक जागरण आपको नियमों, सतर्कता बरतने के उपायों से अवगत करा रहा, जिसे हथियार के रूप में इस्तेमाल करने सिलेंडर कभी शोला नहीं बन सकेगा ...। 

आग लगने पर निडरता दिखाएं, सुरक्षित रहेंगे 

एलपीजी सिलेंडर में लीकेज होने से ही अमूमन आग लगती है। जानमाल का नुकसान सिलेंडर फटने पर ही होता है। यह नौबत सिलेंडर के करीब 15 मिनट तक पूरी तरह से आग में घिरने के बाद ही आती है। ऐसा हम नहीं फार्मूला कहती है, सिलेंडर में गैस करीब 236 से 240 डिग्री के तापमान पर भरने से ही लिक्वीफाइड हो पाती है। इसी वजह से इसे एलपीजी (लिक्वीफाइड पेट्रोलियम गैस) सिलेंडर कहते हैं। इससे अधिक का तापमान बाहर होने पर ही सिलेंडर फटता है। ऐसे में आपकी निडरता ही आपके परिवार और पास-पड़ोस के लोगों को बचा सकती है। 

सिलेंडर में आग लगे तो क्या करें 

चादर, जूट का बोरा भीगोकर सिलेंडर पर डालें। ऐसा ताबड़तोड़ करते रहने से आग ठंडी पड़ जाएगी। 15 मिनट का वक्त आग की तपिश ठंडा करने को बहुत होता है। जरूरत है आपके निडर होकर जरूरी कदम उठाने की है।  

यूं बरते सावधानी, बचेगी जिंदगानी 

जब ट्रालीमैन आपके घर गैस  पहुंचाने जाए तो नियमों का अनुपालन के बाद ही गैस सिलेंडर को किचन में रखें, जो कुछ यूं हैं। 

1. ट्रालीमैन से पहचान पत्र मांगे।

2. सिलेंडर का एक्सपायरी डेट, उसका नंबर चेक करें, जो ऊपरी भाग में तीन पट्टियों पर अंकित होता है।

3- गैस एजेंसी की नीली बुक में सिलेंडर का नंबर ट्राली मैन के हाथों से लिखवाएं तथा उससे हस्ताक्षर करायें। 

4- भरे सिलेंडर का सील और  वजन चेक करें।

5. कैश मेमो देखने के बाद ही भुगतान करें।

6- किसी भी अनाधिकृत विक्रेता से सिलेंडर न लें।

सतर्कता से होगा यह फायदा

1. डुप्लीकेट एवं एक्सपायरी सिलेंडर की आपूर्ति का खतरा नहीं होगा।

2. लीकेज समेत दूसरी गड़बडिय़ों के लिए ट्रालीमैन को चिह्नित किया जा सकेगा।

3. हादसे की स्थिति में एजेंसी संचालन अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकेंगे।

4. सिलेंडर में उचित मात्रा में रसोई गैस मिलेगा।

जब सिलेंडर लगाते समय बरतें सतर्कता 

(1) रसोईघर में/कमरे में जलती हुई सभी आग बुझा दें।

(2) उपकरण/बर्नर की सब नॉब बंद कर दें।

(3) रबड़ नली को चेक करते रहे।

(4) गैस जलाने के पहले माचिस की तीली को जला लेंं।

अगर गैस की गंध पाये

(1) प्रेशर रेगुलेटर के नॉब को सीधा घुमाकर 'ऑफ' कर दें।

(2) देख लें नॉब बंद हैं कि नहीं।

(3) सभी खिड़की और दरवाजे खोल दें।

(4) बिजली के स्विच को ऑन-ऑफ न करे।

बोले अधिकारी : कनेक्शन लेने के साथ ही ग्राहक बीमित हो जाता है। उसके उपयोग एवं सतर्कता बरतने के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है। ग्राहक की नीली बुक पर भी जानकारियां उपलब्ध हैं। नियमों का पालन करने से गैस एजेंसी एवं कंपनी भी मदद करने की स्थिति में रहती है।  -मनीष चौबे, प्रवक्ता, वाराणसी गैस वितरक संघ।

बोले अधिकारी : सिलिंडर तभी फटेगा जब 15 से 20 मिनट तक आग से घिरा रहे। शुरुआत में सतर्कता दिखाने से आग लगने से रोका जा सकता है। - अनिमेष सिंह, सीएफओ। 

जानमाल की क्षति पर मुआवजे का प्रावधान : इंडियन आयल कारपोरेशन के उप क्षेत्रीय प्रबंधक (विक्रय) पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि सिलेंडर ब्लास्ट होने पर जानमाल की क्षति के मुआवजे का प्रावधान है। देश के अलग-अलग क्षेत्रों में कंपनियां बीमा की जिम्मेदारी उठाती हैं। मृत्यु की दशा में छह लाख प्रति व्यक्ति मुआवजा एवं ब्लास्ट से अचल संपत्ति के नुकसान का मुआवजे का प्रावधान है। हालांकि, बीमा करने वाली कंपनी ही जानमाल के नुकसान का आकलन करतीं हैं। उपभोक्ताओं को चाहिए कि नियमों का पालन करें, सतर्कता बरतें ताकि किसी तरह की मुश्किल से बच सकें। 

Posted By: Abhishek Sharma

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