बरेका... बरेका का ‘अमृत शक्ति’ देश व बलिदानियों को समर्पित

-महाप्रबंधक अंजली गोयल ने कारखाना के महत्व पर डाला प्रकाश

-1956 में प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद ने रखी थी आधारशिला

जागरण संवाददाता, वाराणसी : आजादी के 75वें वर्ष के उपलक्ष्य में बरेका ने शुक्रवार को स्वनिर्मित छह हजार अश्व शक्ति के विद्युत रेल इंजन डब्ल्यूजी9 एचसी ‘अमृत शक्ति’ को न्यू लोको टेस्ट शाप से हरी झंडी दिखाकर महाप्रबंधक अंजली गोयल ने राष्ट्र व बलिदानियों को समर्पित किया। इसे दक्षिण रेलवे के अजनी यार्ड को भेजा गया। इस दौरान उन्होंने बरेका के लोको उत्पादन एवं चल रही परियोजनाओं तथा भावी योजनाओं पर भी प्रकाश डाला।

बताया कि इस कारखाना का शिलान्यास 23 अप्रैल 1956 को प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद द्वारा किया गया था। प्रथम ब्राडगेज रेलइंजन डबल्यूडीएम-2 का शुभारंभ तीन जनवरी 1964 को एचसी दासप्पा, रेलमंत्री की उपस्थिति में लाल बहादुर शास्त्री ने किया था। एक सवाल के जवाब में बताया कि बरेका न सिर्फ भारतीय रेल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रेल इंजन का निर्माण कर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि घरेलू एवं विदेशी गैर रेलवे ग्राहकों के लिए भी रेल इंजन का निर्माण कर रहा है। इस अवसर पर बरेका के वरिष्ठ उप महाप्रबंधक विजय, जन संपर्क अधिकारी राजेश कुमार, धर्मेंद्र सिंह आदि मौजूद थे।

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तंजानिया को निर्यात हुआ पहला इंजन

- पहला रेल इंजन तंजानिया को 1976 में निर्यात हुआ। इसके बाद से 630 रेल इंजनों की आपूर्ति की गई। इसमें तंजानिया, वियतनाम, श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार, सेनेगल, सूडान, अंगोला, माली, मोजाम्बिक एवं मलेशिया जैसे देशों को निर्यात किए गए 171 रेल इंजन भी शामिल हैं।

Edited By: Jagran