जागरण संवाददाता, वाराणसी। रोहनिया थाना क्षेत्र की चंद्रिका विहार कालोनी में रिटायर्ड प्रोफेसर व उनकी पत्नी को बंधक बनाकर हुई लाखों रुपये की डकैती में बांग्लादेशी डकैत शामिल थे। इस संबंध में चिनहट थाना क्षेत्र में लखनऊ पुलिस व क्राइम ब्रांच ने रविवार की रात मुठभेड़ में बांग्लादेशी गिरोह के तीन डकैतों को गिरफ्तार किया। इनके पास से प्रोफेसर व उनकी पत्नी के आधार कार्ड व अन्य सामान बरामद किए गए। यही डकैत एक वर्ष पूर्व रोहनिया के ही लठिया में हुई डकैती में भी शामिल थे। गिरफ्तार आरोपितों में बांग्लादेश के खुलना जिले के मोर्लगंज थाना क्षेत्र निवासी शेख रूबेल, आलम उर्फ अलअमीन व रबीउल शामिल हैं।

बता दें कि हरियाणा के रोहतक से रिटायर्ड प्रोफेसर हृदय नारायण राय अपनी पत्नी संग कालोनी में रहते हैं। विगत 25 सितंबर की रात खिड़की का ग्रिल उखाड़ कर डकैतों ने बुजुर्ग दंपती को बांध कर पूरा घर खंगाल दिया था। प्रोफेसर ने वारदात के बाबत अगले दिन लाखों की डकैती का मामला दर्ज कराया था।

एसपी ग्रामीण अमित वर्मा के मुताबिक पूछताछ में घटना में शामिल अन्य डकैतों के नाम भी प्रकाश में आए हैं। यह एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह है, जो अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर विभिन्न राज्यों में डकैती व चोरी की घटनाओं में शामिल रहे हैं। इस गिरोह के डकैत अर्धरात्रि में घर की बाउंड्रीवाल पार कर घर की खिडि़कियों का ग्रिल उखाड़कर घर के सदस्यों को असलहों के बल पर बंधक बनाकर घर का सामान लूट कर फरार हो जाते हैं। इनसे पूछताछ एवं रिमांड की कार्रवाई के लिए एक टीम लखनऊ रवाना की गई तथा इस संबंध में विधिक कार्यवाही की जा रही है। शेष वांछितों की तलाश में टीम रवाना की गई है। इनके विरूद्ध लखनऊ कमिश्नरेट के विभिन्न थानों, कटनी मध्य प्रदेश व अन्य प्रदेशों में भी मुकदमे दर्ज हैं।

कबाड़ी वाला बनकर करते थे रेकी

गिरोह के लोग बीते 20 सितंबर को बार्डर पार करके आए थे। यह लोग ठंड की शुरूआत में हर साल आते थे। इसके बाद रेलवे पटरी किनारे और आस पास के एरिया में कबाड़ी का काम करके, चाय वाला और फेरी का काम करके इलाके की रेकी करते थे। इसके बाद रेकी में घरों को टारगेट कर गिरोह के सरगना को बताते थे। फिर योजनाबद्ध तरीके से आठ से 10 लोग वारदात को अंजाम देते थे। गिरोह के लोग आवागमन में ट्रेन का ही प्रयोग करते थे।

पांच हजार रुपये बार्डर पार कर आते थे

डकैत आसाम और पश्चिमबंंगाल के परगना 24 के रास्ते बार्डर से नदी पार करके बांग्लादेश से आते थे। बार्डर पार करने के लिए कुछ लोगों से इन्होंने सेटिंग कर रखी थी। उन लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। बार्डर पार करने के बाद ट्रेनों से महानगरों में पहुंचते थे। गिरोह के लोग ऐसी ट्रेनों में बैठते थे जिनमें चेकिंग कम हो। इसके बाद वाराणसी, लखनऊ, एमपी समेत अन्य महानगरों में डेरा डालते थे। गिरोह के लोग रेलवे लाइन किनारे बनी पाश कालोनियां टारगेट करते थे। उनमें आसानी से वारदातों को अंजाम देकर यह रेलवे पटरी के रास्ते चले जाते थे। ट्रेन में इनके लोग टिकट लेकर बैठे होते थे। आउटर पर जहां ट्रेन धीमी होती थी अथवा रुकती थी वहीं से बैठकर फरार हो जाते थे। इसके बाद लूट में मिले जेवरात और रुपये बार्डर के रास्ते ही अपने देश भेज देते थे।

Edited By: Saurabh Chakravarty