वाराणसी, जेएनएन। वैश्विक महामारी कोरोना की दूसरी लहर ने भी हर कारोबार को जबरदस्त चोट पहुंचाई है। खासकर लघु कुटीर और सूक्ष्म उद्योगों को। इससे देश-दुनिया में मशहूर बनारसी साड़ी वस्त्र उद्योग को भी अरबों का नुकसान हुआ है। इसलिए अब इस उद्योग को संजीवनी की सख्त जरूरत है। ऐसे में यदि सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो बनारसी साड़ी की कई इकाइयां बंद हो सकती है। काशी एवं आसपास में प्रतिमाह करीब 450 करोड़ का कारोबार होता है जो इनदिनों प्रभावित है। अब तो कोई संजीवनी ही इस कारोबार में जान डाल सकती है। 

 

इस कारोबार से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से करीब छह लाख लोगों की रोजी-रोटी चलती है। लघु उद्योग भारती संघटन, काशी प्रांत से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि फरवरी से अप्रैल तक बनारसी साड़ी एवं वस्त्र का पीक सीजन होता है। बनारसी साड़ी एवं वस्त्र की ज्यादातर बिक्री दक्षिण भारत सहित देश के सुदूर गावों में होती है। साथ ही अन्य देशों गल्फ कंट्री, रूस, कनाडा, इंग्लैंड में बनारसी साड़ी की सप्लाई की जाती है। देश में जहां भी माल भेजा गया है सब पैसा फंस गया है, क्योंकि वहां पर लाकडाउन में सब कुछ बंद है। ऐसे में चाह कर भी व्यापारी पैसा नहीं दे पा रहे हैं। कारण कि यह माल अब नवंबर-दिसंबर तक ही बिक पाएगा। भले ही लाकडाउन खुल जाए लेकिन धंधा नहीं चलने वाला है।

बनारस में पूरे वर्ष मे लगभग पांच हजार करोड़ का बनारसी साड़ी का कारोबार होता है। पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी कारोबारी से लेकर बुनकर की स्थित खराब है। लघु उद्योग भारती काशी प्रांत के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह का कहना है कि बंदी का साइड इफेक्ट यह है कि साड़ी उद्योग पूरी तरह से चरमरा गया है। कारोबारी से लेकर बुनकर तक की स्थित खराब हो गई है। फैशन के युग में हर साल कुछ न कुछ बदलाव होता है, अब यदि अगले सीजन में डिजाइन या फैशन में कुछ बदलाव हुआ तो पिछला सारा माल फंस जाएगा। लाकडाउन के पश्चात उद्यमियों, बुनकरों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती पूंजी की आने वाली है। सरकार से मांग है कि बुनकर तथा उद्यमियों को संजीवनी देने के लिए ब्याज मुक्त लोन दे और पूर्व में दिए गए लोन के ब्याज को जमा करने के लिए अतरिक्त समय दे।

Edited By: Abhishek Sharma