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बनारस‍ियों को अब 24 घंटे म‍िलेगी ब‍िजली, आरएमयू लगने से एक लाइन ट्रिप होने पर दूसरे से होगी आपूर्त‍ि

By pandey jayprakash(01) Edited By: Abhishek sharma
Published: Sat, 24 Oct 2026 11:55 PM (IST)

वाराणसी में उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 44 उपकेंद्रों पर रिंग मेन यूनिट (आरएमयू) लगाए ...और पढ़ें

बनारस में आरएमयू और भूमिगत लाइनों से मिलेगी निर्बाध 24 घंटे बिजली आपूर्ति।

बनारस में आरएमयू और भूमिगत लाइनों से मिलेगी निर्बाध 24 घंटे बिजली आपूर्ति।

HighLights

  1. वाराणसी में 44 उपकेंद्रों पर आरएमयू लगाने का काम जारी।

  2. 14 मार्गों पर 2600 किमी बिजली लाइनें भूमिगत की जा रही हैं।

  3. आरएमयू से निर्बाध बिजली आपूर्ति, हादसों में कमी आएगी।

जेपी पांडेय, जागरण, वाराणसी। उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली मिले, उपकेंद्र से निकलने वाले 11 केवी लाइन में खराबी होने पर उपभोक्ताओं को परेशानी नहीं हो, उन्हें बिजली मिलती रहे। इसको लेकर शहरी क्षेत्र के 33केवी के 44 उपकेंद्रों में रिंग मेन यूनिट (आरएमयू) लगाने का काम शुरू हो गया है।

33केवी उपकेंद्रों से निकलने वाले 11केवी लाइन फीडर में खराबी होने पर दूसरे 11केवी लाइन से उपभोक्ताओं को बिजली मिलने लगेगी। उपकेंद्रों में लगने वाले 689 आरएमयू में से 261 उपकेंद्रों में लगाने का काम तेजी से चल रहा है जबकि 20 उपकेंद्रों पर चार्ज कर लिया गया है। कार्यदायी संस्था एलएनटी को जुलाई-2027 तक इसे लगाने का काम पूरा करना है।

शहर में रोज वीआइपी आने और खुले तारों से कोई दुर्घटना नहीं हो, इसको देखते हुए उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन की ओर से 864 करोड़ रुपये से शहरी क्षेत्र के 14 मार्गों पर 2600 किलोमीटर एचटी व एलटी लाइनें भूमिगत की जा रही है। उसके साथ ही शहर के 44 उपकेंद्रों में आरएमयू लगाया जा रहा है।

आरएमयू से फायदा

उपकेंद्र से निकलने वाले 11केवी फीडर के लिए दो भूमिगत केबल लाइन डाली जाती है जिससे एक लाइन खराब होने पर दूसरे से जोड़ दिया जाय। दूसरे केबल में लाइन जोड़ने में दो से तीन घंटे समय लगता है। इस दौरान उपभोक्ताओं को बिजली संकट झेलना पड़ता है लेकिन आरएमयू लगने के साथ केबल बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आरएमयू से आटोमैटिक दूसरे केबल से सप्लाई जारी हो जाएगी। बिजली कर्मी बाद में खराब केबल को सही करेंगे।

भूमिगत तारों से घटेगा हादसों का खतरा

केंद्र सरकार के रीवाइवल एवं डिस्ट्रिब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के तहत शहर में भूमिगत केबल डालने का काम तेजी से चल रहा है।
शहर में जगह-जगह फैले बिजली के तारों को भूमिगत करने से खुले तारों के टूटने, आपस में टकराने और मौसम के कारण होने वाली खराबियों का खतरा कम होगा। सड़कों और बाजारों में तारों का जाल हटने से शहर की सुंदरता भी बढ़ेगी। खासकर घनी आबादी वाले इलाकों, पर्यटन स्थलों और प्रमुख मार्गों पर इसका लाभ मिल सकता है।

इन मार्गों पर होनी है भूमिगत लाइनें

भोजूबीर से रिंग रोड, मकबूल आलम रोड, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग, ताज और आसपास क्षेत्र, बरेका से बीएचयू, आशापुर से पुरानापुल, मुनारी रोड, सिगरा से रथयात्रा समेत 14 मार्गों पर भूमिगत लाइन डालने का काम शुरू हो चुका है।

इतनी किलोमीटर लाइन होगी भूमिगत

  • 33केवी लाइन 82 किलोमीटर
  • 11केवी लाइन 282 किलोमीटर
  • एलटी लाइन 2124 किलोमीटर
  • उपकेंद्रों पर 689 आरएमयू

शहर में भूमिगत केबल डालने के साथ शहर के 44 उपकेंद्रों पर आरएमयू लगाने का काम शुरू हो गया है। 20 उपकेंद्रों पर चार्ज भी हो गया है। जुलाई-2027 तक भूमिगत केबल डालने के साथ उपकेंद्रों में आरएमयू लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा।

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नीरज श्रीवास्तव, प्रोजेक्ट मैनेजर, एलएनटी