वाराणसी, जागरण संवाददाता। मधुमेह पीड़ितों के पुराने घाव ठीक होने में महीनों व साल नहीं, लगेंगे महज कुछ दिन। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग के विज्ञानियों ने बैक्टीरियोफेज थिरेपी नामक पद्धति से अब मधुमेह पीड़ितों के घाव का शीघ्र इलाज ढूंढ लिया है। लगभग सौ वर्ष पुरानी इस तकनीक का उपयोग अब तक सामयिक संक्रमणों को ठीक करने में ही किया जाता था। विज्ञानियों ने पाया कि इस पद्धति से घाव के उपचार में एएमआर का खतरा 30 फीसद तक कम किया जा सकता है, यह एक सुरक्षित उपचार पद्धति है।

प्रो. गोपाल नाथ के नेतृत्व वाली वैज्ञानिकों की टीम ने जानवरों और नैदानिक अध्ययनों में तीव्र और पुराने संक्रमित घावों की फेजथिरेपी की है। टीम ने चूहों के घाव माडल में स्यूडोमोनास एरुगिनोसा के खिलाफ थिरेपी का प्रभाव भी दिखाया। टीम ने मेथिसिलिन प्रतिरोधी स्टैफिलोकोकस आरियस के कारण होने वाले तीव्र और जीर्ण दोनों प्रकार के आस्टियोमाइलाइटिस के पशु माडल में संक्रमण में फेज काकटेल के प्रभाव का मूल्यांकन किया। इसके अलावा खरगोशों के घाव संक्रमण में भी पोटैशियम तार से बायोफिल्म उन्मूलन का अध्ययन किया। प्रो. गोपाल नाथ बताते हैं कि ऐसे घाव जिसमें सामान्य प्राकृतिक उपचार प्रक्रिया या तो संवहनी, मधुमेह या अल्सर आदि के कारण रुक जाती है या तीन महीने से अधिक का संक्रमण हो जाता है। ये पुराने घाव निरंतर संक्रमित होते रहते हैं, वहीं दूषित या गंदे घाव संक्रमण के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं। ये घाव मरीजों में महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक और शारीरिक रुग्णता का कारण बनते हैं। जैसे दर्द में वृद्धि के कारण कार्य और गतिशीलता का नुकसान होता है ; संकट, चिंता, अवसाद, सामाजिक अलगाव और विच्छेदन, यहां तक कि मृत्यु भी हो जाती है।

एंटी बायोटिक दवाओं का है बेहतर विकल्प : प्रो. गोपालनाथ बताते हैं कि पारंपरिक पुराने घाव के उपचार में अपनाई जाने वाली पद्धतियां जैसे संपीड़न, वार्मिंग, वैक्यूम-असिस्टेड क्लोजर डिवाइस, सिंचाई अक्सर घावों को ठीक करने में सफल होती हैं। फिर भी, कई घाव इन उपचारों से भी ठीक नहीं हो पाते। वे न सिर्फ बार-बार संक्रमित होते हैं, बल्कि ताजा बने रहते हैं। संक्रमण और बाद में बायोफिल्म का गठन घावों के बने रहने का प्रमुख कारण है क्योंकि इस पर पारंपरिक एंटीबायोटिक चिकित्सा काम नहीं करती है। ऐसे में एंटीबायोटिक दवाओं के विकल्प की तलाश अब एक विवशता बन गई है। सौभाग्य से, बैक्टीरियोफेज थिरेपी एंटीबायोटिक के लिए एक बेहतर समाधान के रूप में सामने आया है।

अनेक तरह से लाभदायक है बैक्टीरियोफेज थिरेपी : बैक्टीरियोफेज एमडीआर, जीवाणु संक्रमण के उपचार के लिए वैकल्पिक रोगाणुरोधी चिकित्सा है। इसके कई लाभ सामने आए हैं। जैसे नैदानिक सुरक्षा, जीवाणुनाशक गतिविधि, जरूरत पड़ने पर माइक्रोबायोम में नगण्य गड़बड़ी, बायोफिल्म डिग्रेडिंग में फायदेमंद, अलगाव में आसानी व तेजी तथा फार्मास्युटिकल फार्मूलेशन की कम लागत। सबसे बड़ी बात कि फेज थिरेपी ही ऐसे घावों पर वास्तव में असरकारक दिखी।

ये लोग थे शोध टीम में शामिल : प्रो. गोपालनाथ, प्रो. एसके भारतीय, प्रो. वीके शुक्ला, डा. पूजा गुप्ता, डा. हरिशंकर सिंह, डा. देवराज पटेल, राजेश कुमार, डा. रीना प्रसाद, सुभाष लालकर्ण आदि। यह शोध अमेरिका के संघीय स्वास्थ्य विभाग के राष्ट्रीय जैवप्रौद्योगिकी सूचना केंद्र में 5 जनवरी, 2022 को प्रकाशित हुआ है।

Edited By: Abhishek Sharma