आजमगढ़ [राकेश श्रीवास्‍तव]। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के विधानसभा चुनाव लड़ने के संकेत आने के बाद उनके संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में काफी सियासी गहमागहमी शुरू हो गई है। सपा अध्यक्ष ने इस बाबत विधानसभा चुनाव 2022 में खुद मैदान मे उतरने का एलान सामने आने के बाद से‍ सियासी चर्चाओं ने पूर्वांचल में सिर उठाना शुरू कर दिया है। पार्टी सूत्रों के ह‍वाले से माना जा रहा है कि आजमगढ़ की गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र से वह विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। आजमगढ़ लोकसभा सीट से फ‍िलहाल अखिलेश यादव ही सांसद हैं, वहीं गोपालपुर सीट को लेकर आजमगढ़ में बुधवार की सुबह से ही सियासी पारा बढ़ने के साथ ही पार्टी में चर्चा का दौर शुरू हो गया है। 

दरअसल आगे लोकसभा चुनाव भी होना है और आजमगढ़ को छोड़ने से विरोधी दलों के पास मौका बढ़ जाएगा। लिहाजा आजमगढ़ छोड़ने से पूर्वांचल पर समाजवादी पार्टी की पकड़ कहीं से कमजोर न होने पाए लिहाजा आजमगढ़ से ही अखलेश यादव के विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा है। ऐसे में गोपालपुर की सीट को लेकर चर्चाओं के बीच पार्टी के स्‍तर पर यहां से तैयारियों को लेकर पार्टी के पदाधिकारी जुटने लगे हैं।

विधानसभा क्षेत्र का समीकरण : आजमगढ़ में गोपालपुर क्षेत्र के जातिगत समीकरण को देखा जाए तो लगभग 33 फीसद यादव, 28 फीसद अनुसूचित जाति, 13 फीसद मुसलमान, 13 फीसद सवर्ण एवं 12 फीसद ओबीसी मतदाता हैं। यहां पर जातिगत आधार पर किन्हीं दो बड़े वर्गों का मत जिसके भी साथ होता है उसी की विजय सुनिश्चित होने की प्रबल संभावना रही है। 

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लोकसभा चुनाव 2019 का परिणाम : आजमगढ़ लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2019 में जीत हासिल की थी। चुनाव के दौरान सपा की ओर से अखिलेश यादव तो भाजपा की ओर से भोजपुरी फिल्मों के चर्चित चेहरे के तौर पर दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' मैदान में थे। चुनाव परिणाम आया तो 259951 वोटों से अखिलेश ने भाजपा प्रत्‍याशी को मात दी थी। इस दौरान समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अखिलेश यादव को 620889 मत जबकि भाजपा प्रत्याशी निरहुआ को 360898 मत हासिल हुए थे। इस प्रकार लाेकसभा चुनाव में अखिलेश यादव को 60.42 फीसद तो दिनेश लाल यादव निरहुआ को 35.12 फीसदी मत प्राप्‍त हुए थे। इस सीट पर कांग्रेस की ओर से कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं था। वहीं आजमगढ़ लोकसभा सीट पर तीसरे नंबर पर सुभासपा के प्रत्याशी अभिमन्यु सिंह सन्नी रहे जिन्हें मात्र 9933 वोट मिल सके थे। यहां पर 7218 लोगों ने नोटा बटन का प्रयोग किया था। 

विधानसभा का अब तक परिणाम : वर्ष 1993 में सपा -बसपा गठबंधन के बाद से यह सीट इन्हीं पार्टियों के खाते में रही है। गठबंधन में बसपा के इरशाद विधायक बने तो उसके बाद वर्ष 1996 से अब तक 2017 तक हुए चुनाव में एक बार श्यामनारायण यादव बसपा से वर्ष 2007 में चुनाव जीते थे, जबकि शेष समय विधायकी सपा के ही हाथ में रही। वर्ष 2017 में पहली बार नफीस अहमद सपा के विधायक बने हैं। इस लिहाज से समाजवादी पार्टी के लिए यह सीट काफी मुफीद और सुरक्षित भी मानी जा रही है। 

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Edited By: Abhishek Sharma