वाराणसी, जेएनएन। अयोध्या के विवादस्पद स्थल की खुदाई का कार्य उच्च न्यायालय के आदेश पर पहली बार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने किया। इसके पूर्व ऐसा कभी नहीं हुआ था। इस प्रकरण में खुदाई के दौरान लगभग 1680 ईसापूर्व के अवशेष मिले।विवादस्पद स्थल के संबंध में लगभग 308 पेज का रिपोर्ट उच्च न्यायालय को सौंपा गया। ये बातें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पूर्व निदेशक डॉ. बी आर मणि ने सारनाथ स्थित पुरातत्व विभाग के धर्म चक्र सभागार में अयोध्या उत्खनन विषयक व्याख्यान में बुधवार को कही।

उन्होंने कहा कि खुदाई के प्रारम्भ में 14 लोगों की टीम काम कर रही थी। काम की अधिकता को देखकर लोगों की संख्या बढ़कर 53 हो गई। लेकिन रिपोर्ट बनाने में केवल 23 लोग का योगदान रहा। बताया कि उच्च न्यायालय को सौंपने की रिपोर्ट 10 पाठ्यक्रम में बनाया गया था। इसमें खुदाई वाली साइट्स की लगभग 235 फोटो एवं 65 ड्राइंग  शामिल थी। बताया कि 17 सेम्पल के कार्बन डेटिंग टेस्ट में उत्तरी कृष्णामार्जित मृदभांड काल (1680-1320 ईसापूर्व) के अवशेष मिले। इसके पूर्व लोग अयोध्या का काल 700 ईसापूर्व का ही जानते थे। इसके बाद खुदाई में शुंग वंश, कुषाण काल, गुप्त काल, उत्तर गुप्त काल के अवशेष मिले। मध्यकाल में राजपूत काल, सल्तनत काल, मुगल काल एवं उत्तर मुगल काल के अवशेष मिले। उन्होंने कहा कि  इसके पूर्व लोगों का मानना था कि अयोध्या का गुप्त काल से संबंध नहीं है। जबकि गुप्त काल के दो सिक्के खुदाई स्थल से मिले हैं। कहा कि अयोध्या के विवादित स्थल की खुदाई में मिले पाषाणों पर बनी नक्काशी 12वीं शताब्दी में बने सारनाथ के कुमारदेवी मोनेस्ट्री की नक्काशी से मिलती है।

अयोध्या के राम मंदिर का फाउंडेशन भी कुमारदेवी के फाउंडेशन के तरीके से मिलता है। बताया कि अयोध्या के विवादित स्थल पर खुदाई में 84 नक्काशी युक्त मंदिर के खंभे मिले, जो विवादित ढांचा के क्षेत्र से ज्यादा दूरी में फैले थे एवं प्लास्टर युक्त दीवारें भी मिली। अभिषेक का जल बहने के लिए विशेष प्रकार (तीन कोने) की नाली भी मिली। इससे प्रतीत होता है कि पूर्व में विशाल एवं भव्य मंदिर का निर्माण हुआ था। बाद में उसी स्थल को प्लेन कर मस्जिद बना दी गई। बताया कि 1949 ईसवीं के बाद विवादित स्थल पर नमाज नहीं पढ़ा गया। अयोध्या के विवादस्पद स्थल की खुदाई की टीम में शामिल अधीक्षण पुरातत्वविद नीरज सिन्हा ने बताया कि विवादित स्थल की खुदाई में 33 प्रतिशत मजदूर मुसलमान थे। सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक दो मजिस्ट्रेट तैनात रहते थे। इसमे से एक मजिस्ट्रेट मुस्लिम थे। बताया कि यदि वृहद क्षेत्र जैसे कनक भवन, कोप भवन आदि जगहों पर खुदाई हो तो 1680 ईसापूर्व के भी पहले के अवशेष प्राप्त हो सकते हैं। अध्यक्षता प्रो. मृदुला जायसवाल संचालन डॉ. मनीषा सिंह ने किया। इस मौके पर प्रो. ओमकार नाथ सिंह, राकेश उपाध्याय, डॉ. विनय कुमार, डॉ. नितेश सक्सेना,  अभय जैन सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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