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शारदीय नवरात्र पर देवी का हाथी पर आगमन और मुर्गे पर विदायी, जानें क्या कहते हैं शास्‍त्रीय व‍िधान

By Digital Desk Edited By: Abhishek sharma
Published: Wed, 12 Aug 2026 05:00 AM (IST)

शारदीय नवरात्र 2026 में 11 अक्टूबर को हाथी पर देवी का आगमन होगा, जिसे शुभ माना जा रहा है। हालांकि, ...और पढ़ें

शारदीय नवरात्र 2026: देवी का हाथी पर आगमन, मुर्गे पर विदाई के शास्त्रीय विधान।

शारदीय नवरात्र 2026: देवी का हाथी पर आगमन, मुर्गे पर विदाई के शास्त्रीय विधान।

HighLights

  1. शारदीय नवरात्र 2026, 11 अक्टूबर से हाथी पर आगमन।

  2. हाथी पर आगमन शुभ, समृद्धि और वर्षा का प्रतीक माना।

  3. मुर्गे पर विदाई अशुभ, समाज में व्याकुलता, उथल-पुथल का संकेत।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर को प्रारंभ हो रहा है और 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। इस बार रविवार को पहला नवरात्र का दिन होने के कारण देवी का आगमन हाथी पर होगा, जबकि मंगलवार को कुक्कुट यानी मुर्गे पर विदाई होगी। वर्ष 2026 में विजयादशमी का त्योहार मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब नवरात्रि का समापन या माता का प्रस्थान मंगलवार या शनिवार को होता है, तो उनका वाहन चरणायुध (मुर्गा/कुक्कुट) होता है। शास्त्रों में माता रानी का मुर्गे पर विदा होना शुभ नहीं माना जाता है। यह वाहन समाज में व्याकुलता, उथल-पुथल, शोक और कष्ट बढ़ने की ओर इशारा करता है। हालांकि, भक्तों द्वारा की गई सच्ची भक्ति और आराधना इन नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकती है।

शास्त्रों में कहा गया है, "शनिभौमदिने यदि सा विजया चरणायुधयानकरी विकला।" अर्थात, शनिवार या मंगलवार के दिन जब मां दुर्गा विदा होती हैं, तो वह 'चरणायुध' (मुर्गे) पर सवार होकर जाती हैं। वहीं, शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर से हो रही है।

शास्त्रों की मान्यता के अनुसार, यदि नवरात्रि का आरंभ रविवार या सोमवार के दिन होता है, तो माता दुर्गा का आगमन हाथी पर होता है, जिसे शुभ वर्षा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस बार देवी का आगमन हाथी पर होने से भक्तों में उत्साह है और इसे सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

नवरात्रि के दौरान भक्तजन माता दुर्गा की आराधना करते हैं और विभिन्न अनुष्ठान करते हैं। इस अवसर पर विशेष पूजा-पाठ, हवन और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। भक्तजन नवरात्रि के नौ दिनों तक उपवास रखते हैं और माता की कृपा प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रकार के व्रत करते हैं।

इस बार नवरात्रि का पर्व विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि देवी का आगमन हाथी पर हो रहा है, जो समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है। भक्तजन इस अवसर पर अपने घरों में विशेष सजावट करते हैं और माता के स्वागत के लिए तैयारियां करते हैं।

विजयादशमी के दिन, जब देवी का विदाई मुर्गे पर होगा, तब भक्तों को चाहिए कि वे अपनी भक्ति और श्रद्धा को बनाए रखें। इस दिन विशेष रूप से माता की आराधना करने से भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति प्राप्त होती है। काशी के ज्‍योत‍िषाचार्य नवरात्र को देवी साधाना का पर्व बताते हुए शुभ की कामना करने की बात बताते हैं। 

इस प्रकार, शारदीय नवरात्र का पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह समाज में एकता और भाईचारे का संदेश भी देता है। भक्तजन इस अवसर पर एकत्रित होकर माता की आराधना करते हैं और एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियों का आदान-प्रदान करते हैं। हालांक‍ि शुभ और अशुभ फल कर्म आधार‍ित होते हैं, ल‍िहाजा ज्योत‍िषाचार्य मान रहे हैं क‍ि देवी के आशीष से सब कुछ संभव है।