सेना के पराक्रम का सम्मान, लेकिन एयर शो की तिथि ऐसी होनी चाहिए थी जिससे काशीवासियों को परेशानी न हो : अजय राय
अजय राय ने नाटी इमली भरत मिलाप के दौरान वाराणसी में एयर शो के आयोजन की तिथि पर सवाल उठाए, ...और पढ़ें

अजय राय ने नाटी इमली भरत मिलाप के दौरान एयर शो की तिथि पर उठाए सवाल।
HighLights
अजय राय ने नाटी इमली भरत मिलाप में शामिल होकर परंपरा निभाई।
वाराणसी एयर शो की तिथि पर सवाल, जनता को हुई परेशानी।
प्रधानमंत्री मोदी से काशी की परंपराओं के सम्मान की अपील।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी की विश्व प्रसिद्ध नाटी इमली के भरत मिलाप में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अजय राय शामिल हुए। काशी की ऐतिहासिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति अपनी गहरी आस्था और जुड़ाव को जीवंत रखते हुए अजय राय प्रत्येक वर्ष इस भव्य लक्खा मेला में सहभागिता करते हैं।
इस वर्ष भी उन्होंने प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न सहित चारों भाइयों के ऐतिहासिक मिलन की अद्भुत लीला के दर्शन किए। चारों भाइयों के स्नेह, त्याग, समर्पण और आत्मीयता से परिपूर्ण इस ऐतिहासिक दृश्य को देखकर वह भावविभोर हो उठे। इस अवसर पर उन्होंने प्रभु श्रीराम से उत्तर प्रदेश की जनता के सुख, समृद्धि, शांति, खुशहाली और जनकल्याण की कामना की।
नाटी इमली का भरत मिलाप काशी का विश्व प्रसिद्ध 488 वर्ष पुराना लक्खा मेला है, जो काशी की प्राचीन धार्मिक आस्था, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं का प्रतीक है। इस आयोजन में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। अजय राय का प्रतिवर्ष इस लीला में शामिल होना काशी की परंपराओं के प्रति उनके सम्मान और श्रद्धा को दर्शाता है।
इस अवसर पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि आस्था, अध्यात्म, संस्कृति, लोकाचार और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत संगम है। यहां मां गंगा की पवित्र धारा के साथ गंगा-जमुनी तहजीब की मिठास बहती है। काशी की पहचान उसकी धार्मिक आस्था, समृद्ध संस्कृति, आपसी भाईचारे और सदियों पुरानी लोक परंपराओं से है। नाटी इमली का भरत मिलाप इसी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है।
नाटी इमली का भरत मिलाप काशी का 488 वर्ष पुराना विश्व प्रसिद्ध लक्खा मेला है। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि काशी की आत्मा, जनआस्था और ऐतिहासिक परंपरा का प्रतीक है। इस मेले में लाखों लोग शामिल होते हैं, जिसके चलते शहर में आवागमन प्रभावित होता है। काशीवासियों की धार्मिक भावनाएं इस आयोजन से गहराई से जुड़ी हुई हैं और इसकी परंपरा को निभाना हम सभी का दायित्व है।
वाराणसी देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। वर्ष 2014 से वह वाराणसी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ऐसे में उनको काशी की विश्व प्रसिद्ध परंपराओं, ऐतिहासिक आयोजनों की पर्याप्त जानकारी रखनी चाहिए और यहां के जनजीवन की विशेषताओं की जानकारी तथा उनका सम्मान होना चाहिए।काशी की इतनी महत्वपूर्ण परंपरा के दिन ही एयर शो का आयोजन रखा गया, जबकि तिथि के निर्धारण में स्थानीय जनजीवन और लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को ध्यान में रखा जा सकता था।
हम सभी भारतीय सेना के पराक्रम, अदम्य साहस और शौर्य का सम्मान करते हैं। देश की सीमाओं की रक्षा करने वाली हमारी सेना पर हम सबको गर्व है। वाराणसी में एयर शो का आयोजन स्वागत योग्य है और हम इसका सम्मान करते हैं। लेकिन मेरा सवाल आयोजन के उद्देश्य पर नहीं, बल्कि इसकी तिथि के निर्धारण पर है। जब काशी में 488 वर्ष पुराना विश्व प्रसिद्ध लक्खा मेला नाटी इमली का भरत मिलाप आयोजित हो रहा हो, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं और शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है, तो एयर शो की तिथि आगे-पीछे करके ऐसा समय निर्धारित किया जाना चाहिए था, जिससे काशीवासियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़ता।
काशी के सांसद होने के नाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यहां की ऐतिहासिक परंपराओं, धार्मिक आयोजनों और जनभावनाओं को समझना चाहिए। काशी की परंपराओं को आत्मसात करना, उनके महत्व पर मंथन करना और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर आयोजनों की योजना बनाना आवश्यक है। काशी केवल प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत की नगरी है।
यहां के आयोजनों का निर्धारण करते समय काशी की विशिष्ट परंपराओं और आम नागरिकों की सुविधा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।हम काशीवासी अपनी परंपराओं को जानते हैं, उनका सम्मान करते हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी उन्हें निभाते आ रहे हैं। काशी का भरत मिलाप हमारी आस्था और सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। कहा कि प्रधानमंत्री से कहना चाहता हूं कि आप काशी के सांसद हैं, तो यहां की परंपराओं को समझिए, उन्हें आत्मसात कीजिए और किसी भी बड़े आयोजन की तिथि तय करने से पहले स्थानीय परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार कीजिए।
हम सेना के पराक्रम का स्वागत करते हैं, उसका सम्मान करते हैं, लेकिन आयोजन इस प्रकार होना चाहिए कि हमारी ऐतिहासिक परंपराएं भी निर्बाध रूप से संपन्न हों और जनता को भी परेशानी न हो।भरत मिलाप में प्रभु श्रीराम और उनके भाइयों का मिलन हमें प्रेम, त्याग, मर्यादा, समर्पण और पारिवारिक एकता का संदेश देता है। काशी की सांस्कृतिक पहचान उसकी विविधता, सामाजिक समरसता और साझा विरासत में निहित है।
यहां की गंगा-जमुनी तहजीब पूरे देश को आपसी सद्भाव और भाईचारे का संदेश देती है। ऐसे ऐतिहासिक आयोजनों को संरक्षित रखना हम सभी का सामूहिक दायित्व है प्रभु श्रीराम से देश व प्रदेश की जनता के कल्याण, सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करते है काशी की आस्था, संस्कृति, लोकाचार और भाईचारे की यह विरासत सदैव जीवंत रहनी चाहिए।
नाटी इमली का भरत मिलाप इसी गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है, जो हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को आस्था और संस्कृति के एक सूत्र में पिरोता है। भरत मिलाप की लीला में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के साथ - महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, मनीष मोरोलिया, ओमप्रकाश ओझा ,अमित पाठक ,रोहित दुबे, आनंद पांडेय,आशीष गुप्ता ,रवि , अश्वनी यादव सहित अन्य लोग शामिल हुए।
