वाराणसी, जेएनएन। संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली संस्था भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगामी 13 से 28 सितंबर 2019 तक पुरावशेषों व बहुमूल्य कलाकृतियों के पंजीकरण का एक विशेष अभियान प्रारंभ करने जा रही है। पत्थर, पकी मिट्टी, धातु, हाथी दांत या हड्डी से बनी प्रतिमा, कागज, काष्ठ और कपड़े के ऊपर बनी चित्रकारी, हाथ से की गई चित्रकारी आदि पुरावशेष हो सकते हैं। 

इस संबंध में अधीक्षण पुरातत्वविद नीरज सिन्हा ने बताया कि पंजीयन के लिए जरूरी है कि ये पुरावशेष कम से कम 100 वर्ष पुरानी हों। इनका निबंधन पुरावशेष और बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम 1972 की धारा 14 के तहत किया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सारनाथ मंडल के अंतर्गत आने वाले पूर्वांचल के 23 जिलों के नागरिक इसमें शामिल हो सकते हैं। इसके लिए एक निर्धारित प्रपत्र में पुरावशेष का फोटो लगाकर आवेदन किया जा सकता है। पंजीयन अधिकारी उस पुरावशेष की जांच करने के बाद उसको एक विशेष पंजीयन संख्या देकर मालिक को वापस कर देंगे। भारत के सभी प्राचीन धरोहरों के प्रलेखीकरण के लिए भारत सरकार का यह सार्थक पहल माना जा रहा है। पंजीयन के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण कार्यालय में संपर्क करना होगा।

पंजीयन से पूर्व जरूरी कवायद  

-पुरावशेष के तीन पोस्ट कार्ड साइज फोटोग्राफ

-आवेदन पत्र ( निर्धारित प्रोफार्मा फॉर्म नंबर 7)

-फॉर्म नंबर 7 की तीन प्रति पूर्ण रूप से भर कर जमा करना होगा। 

लगेगी तीन दिनी प्रदर्शनी 

25 से 27 सितंबर तक इन पुरावशेषों की प्रदर्शनी पुरावशेषों के स्वामी की अनुमति से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के मंडल कार्यालय में लगाई जाएगी।

सारनाथ क्षेत्र के अंतर्गत जिले 

प्रयागराज, अंबेडकर नगर, बस्ती, फैजाबाद, गोण्डा, कौशांबी, संत कबीर नगर, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, आजमगढ़, बलिया, चंदौली, देवरिया, कुशीनगर, गाजीपुर, गोरखपुर, जौनपुर, मऊ, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, सोनभद्र, वाराणसी और महाराजगंज।

Posted By: Abhishek Sharma

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