जागरण संवाददाता, वाराणसी। अनंत चतुर्दशी की शुरुआत महाभारत काल से हुई थी। यह पर्व भारत के कई राज्यों में बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की लोक कथाएं सुनी जाती हैं तथा भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा करने से प्राणी समस्त दु:खो से निवृत्त होकर परम सुख को प्राप्त करता है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने सृष्टि की शुरुआत में चौदह लोकों तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, तथा भू:, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य, मह की रचना की थी। इतना ही नहीं, इन लोकों की रक्षा व पालन के लिए भगवान विष्णु खुद भी चौदह रूपों में प्रकट हो गए थे, जिससे वे अनंत प्रतीत होने लगे।

संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के छात्र पंडित प्रकाश शास्त्री बताते है कि अनंत चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और अनंत फल देने वाला माना गया है। इस व्रत को महिलाएं सुख-समृद्धि, धन-धान्य और संतान प्राप्ति के लिए करती हैं। साथ ही जिनके कुण्डली में विवाह संबंधी समस्याएं हो उनके लिए यह व्रत बहुत ही फलदाई होता है।

इस वर्ष ये पर्व 19 सितंबर 2021 रविवार के दिन मनाया जाएगा। चतुर्दशी तिथि 19 सितंबर 2021 को सूर्योदय से पूर्व सुबह 5 बजे से प्रारंभ होकर, अगले दिन यानि 20 सितंबर 2021 को सुबह 4 बजकर 50 मिनट तक है।

शास्त्री बताते है कि लोकजन इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करता है तो उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के ऊपर ॐ वासुदेवाय नम: मंत्र का जप करते हुए कमल अर्पित करें तथा पीले रंग का पुष्प,चंदन तथा अष्टगंध से भगवान का अर्चन करें।

भगवान की पूजा के पश्चात् जरुरमंदों को भोजन कराएं। ऐसा करने से भगवान विष्णु के कृपा से प्राणी समस्त दु:खो से निवृत्त होकर परम सुख को प्राप्त करता है।

Edited By: Saurabh Chakravarty