वाराणसी, जेएनएन। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद गुरुवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहली बार बनारस में होंगे। बीएचयू स्थित स्वतंत्रता भवन सभागार में भारत अध्ययन केंद्र की ओर से आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी 'गुप्तवंशैक-वीर : स्कंदगुप्त विक्रमादित्य का ऐतिहासिक पुन:स्मरण एवं भारत राष्ट्र का राजनीतिक भविष्य' का शुभारंभ करने के साथ ही वह बतौर मुख्य वक्ता अपने विचार व्यक्त करेंगे। गृहमंत्री के आगमन के मद्देनजर बुधवार को जहां तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया, वहीं प्रशासन भी मुस्तैद नजर आया।

अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में गृहमंत्री सैदपुर-गाजीपुर के भितरी अभिलेख का वर्णन करते हुए गुप्त वंश के वीर स्कंदगुप्त विक्रमादित्य से जुड़े उन तथ्यों को प्रस्तुत करेंगे, जिन्हें इतिहास में उतना महत्व नहीं दिया गया, जितने के वे हकदार थे। इसके अलावा गृहमंत्री भारत के राजनीतिक भविष्य पर भी अपनी बात रखेंगे। उद्घाटन सत्र में उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व केंद्रीय मंत्री महेंद्र पांडेय भी शामिल होंगे। संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में 'गुप्तवंशैक-वीर' का उदय, हूण आक्रमण, तत्कालीन राजनीतिक चुनौतियां, स्कंदगुप्त का पराक्रम, उत्खनन-अभिलेख-मुद्राएं एवं साहित्य, गुप्तकालीन भारत का वैश्व आयाम सहित भारत के सम्मुख राजनीतिक चुनौतियां आदि विषयों पर प्रो. दीनबंधु पांडेय, डा. बीआर मणि, प्रो. संजय भारद्वाज, प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी, प्रो. युगल किशोर मिश्र सहित डा. काशीनाथ न्योपाने-नेपाल, डा. नरसिंह सी पंडा-बैंकाक, प्रो. ओइवा तकाकी-जापान, डा. डो थू हा-वियतनाम आदि गुप्त वंश के इस वीर के संदर्भ में ऐतिहासिक तथ्यों को रखेंगे।

संयोजक प्रो. राकेश कुमार उपाध्याय के मुताबिक स्कन्दगुप्त (455 ई. से 467 ई.) ने तत्कालीन विश्व सभ्यताओं के समक्ष सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरे बर्बर हूणों को न केवल सामरिक रूप से परास्त किया, बल्कि उन्हें देश की सरहदों से बाहर निकालने में भी सफलता हासिल की थी। यही कारण है कि वर्तमान राजनीतिक और वैश्विक परिस्थिति में स्कंदगुप्त विक्रमादित्य का पुन:स्मरण स्वभाविक हो जाता है। संगोष्ठी के समन्वयक प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी व आयोजन सचिव डा. ज्ञानेंद्र नारायण राय हैं।

सुरक्षा एजेंसियों ने बीएचयू में डाला डेरा

गृहमंत्री अमित शाह, सीएम योगी आदित्यनाथ के आगमन से पूर्व बीएचयू के फिर अशांत होने को लेकर खुफिया तंत्र सक्रिय हो गया है। गृहमंत्री की फोटोयुक्त बैनर पर कालिख लगाए जाने की सूचना मिलते ही सुरक्षा-खुफिया तंत्र सकते में आ गया। आनन-फानन में बीएचयू में केंद्रीय व प्रदेश की खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी पहुंचे। बीएचयू प्रशासन से वार्ता के बाद इसका पता लगाया जा रहा कि जब भी बीएचयू में कोई वीवीआइपी मूवमेंट होने वाला होता है उसी दौरान बवाल क्यों होता है। बीएचयू में प्रदर्शन के चलते वाराणसी प्रवास के दौरान पीएम मोदी तक को कंटीजेंसी रूट से ले जाया गया था। खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि छात्रों को कोई भड़का रहा है और ऐसे समय ही साजिश रची जाती है जब किसी वीवीआइपी का आगमन होता है।

 गृहमंत्री के साथ ही मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए बीएचयू में आयोजन स्थल से लेकर लंका चौराहे तक चप्पे-चप्पे पर जवान की नजर है। सुरक्षा- व्यवस्था के लिए दो आइपीएस, 10 अपर पुलिस अधीक्षक, 16 क्षेत्राधिकारी, आठ थानाध्यक्ष, क्राइम ब्रांच के अलावा पीएसी और केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान बीएचयू में तैनात किए गए हैं।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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