वाराणसी में तिलक-शिखा पर छात्र को डांटने का आरोप, प्रबंधन ने अनुशासनहीनता का लगाया आरोप
वाराणसी के लक्ष्मीशंकर इंटर कॉलेज में एक छात्र को तिलक, शिखा और कलावा धारण करने पर प्रधानाचार्य द्वारा डांटने और ...और पढ़ें

वाराणसी में तिलक शिखा पर छात्र को डांटने का आरोप कॉलेज प्रबंधन ने बताया अनुशासनहीनता।
HighLights
छात्र को तिलक, शिखा, कलावा धारण करने पर डांटा गया।
प्रधानाचार्य पर नाम काटने की धमकी देने का आरोप।
कॉलेज ने आरोपों को अनुशासनहीनता का मामला बताया।
जागरण संवाददाता, चौबेपुर (वाराणसी)। क्षेत्र के राजवारी स्थित लक्ष्मीशंकर इंटर कॉलेज में माथे पर चंदन का टीका, शिखा और हाथ में कलावा बांधकर आए 11वीं के छात्र को प्रधानाचार्य द्वारा डांटने और नाम काटने की धमकी देने का मामला सामने आया है। छात्र द्वारा सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल किए जाने के बाद सनातनी संगठनों और लोगों में आक्रोश फैल गया है। वहीं, कॉलेज प्रबंधन ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए मामले को अनुशासनहीनता से जुड़ा बताया है।
लक्ष्मीसेनपुर (टेकुरी) निवासी छात्र के अनुसार, 22 सितंबर को वह रोजाना की तरह कॉलेज गया था। छात्र का कहना है कि वह पूजा-पाठ करता है, इसलिए तिलक, शिखा और कलावा धारण करता है। आरोप है कि दोपहर में छुट्टी के समय कॉलेज प्रांगण में खड़े होने के दौरान प्रधानाचार्य डॉ. अरविंद कुमार ने उसे बुलाया और धार्मिक प्रतीकों पर आपत्ति जताते हुए शिखा कटवाकर आने को कहा।
इसके साथ ही दोबारा ऐसा दिखने पर कॉलेज से नाम काटने की चेतावनी दी। इसके बाद छात्र ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर अपनी बात रखी, जिसमें एक अन्य शिक्षक के माध्यम से प्रधानाचार्य द्वारा खेद जताए जाने की बात भी सामने आ रही है। इस घटना के बाद से छात्र कॉलेज नहीं जा रहा था, हालांकि उसने सोमवार से पढ़ाई के लिए जाने की बात कही है।
छात्राओं के बीच जबरन निकलने पर लगी थी डांट: प्रबंधक
दूसरी ओर, कॉलेज की प्रबंधक सुभद्रा देवी ने छात्र के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे फर्जी करार दिया है। उन्होंने बताया कि विद्यालय में नियम है कि छुट्टी के समय पहले छात्राओं को बाहर निकाला जाता है, उसके बाद छात्रों को जाने की अनुमति मिलती है। उक्त छात्र छात्राओं के बीच से जबरन निकलने की कोशिश कर रहा था। पूर्व में भी वह इस तरह की हरकत कर चुका था, जिस पर प्रधानाचार्य ने उसे अनुशासन बनाए रखने के लिए डांट लगाई थी। प्रबंधक के अनुसार, अपनी गलती छिपाने के लिए छात्र ने धार्मिक रंग देते हुए यह मनगढ़ंत आरोप लगाया है।
