वाराणसी [रवि पांडेय]। आखिर छह माह बाद गुरुवार को वह दिन आ गया जब गंगा नदी पर एनएच-2 को जोडऩे वाला विश्वसुंदरी पुल के ज्वाइंट प्लेटों को बनाने का काम शुरू हो गया। इसके लिए पुल पर एक लेन बंद करके दूसरे में डिवाइडर बनाकर डायवर्जन शुरू हो गया है। शुक्रवार से प्लेट लगाने का कार्य होगा।

यूपी-बिहार के सीमा पर बने कर्मनाशा नदी का पुल टूटने के बाद एनएच-2 पर ओवरलोड ट्रकों और भीषण जाम से विश्वसुंदरी पुल पर खतरा बढ़ गया था। एनएचएआइ की देखरेख में इंजीनियरों ने पुल का सर्वे किया तो पुल के कई ज्वाइंट की बेयरिंग और रबर टूटी मिली। इसके अलावा पी-4 ज्वाइंट पर लोड के कारण एक्सपेंशन ज्वाइंट प्लेट ही टूट गई।

पुल के खतरे को देखते हुए विश्वसुंदरी पुल पर कुछ समय के लिए रामनगर से डाफी जाने वाली लेन को रोक दिया गया और सड़क बनाने वाली संस्था की टेक्निकल टीम और कंस्ट्रक्शन टीम ने पुल पर बने पी-4 ज्वाइंट के पास लोहे की अस्थायी प्लेट लगाकर यातायात शुरू किया। छह महीने तक लापरवाह कंपनी ने प्लेट नहीं बदली जबकि एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने 15 दिन में बदलने का दावा किया था। छह महीने तक ऊपर से लोहे की प्लेट लगाकर काम चल रहा था जबकि लॉकडाउन के समय कम गाडिय़ों का दबाव था और बिना जाम लगे प्लेट लगाई जा सकती थी।

सड़क निर्माण और पुल का टेक्निकल काम करने वाली भोपाल की सैनफील्ड नामक कंपनी ने विदेश से एक्सपेंशन जॉइंट प्लेट मंगाया है। डाफी और रामनगर तथा बनारस के बाइक और कार सवार लोगों को दो महीने तक विश्वसुंदरी पुल पर जाम झेलना पड़ सकता है। ऐसे में सामनेघाट से रामनगर पुल से यात्रा करना आसान रहेगा। टोल प्लाजा हेड मनीष कुमार ने बताया कि एक लेन पूरी तरह से बंद रहेगी और दूसरी लेन से ही डिवाइडर बनाकर गाडिय़ों के आने जाने की व्यवस्था की जा रही है।

जर्जर पुल-सड़क पर चार गुना वसूली

पिछले 10 वर्षों में डाफी टोल प्लाजा से गुजरने वाली गाडिय़ों की संख्या चार गुना बढ़ गई लेकिन कार्यदायी संस्था की लापरवाही के कारण सड़कें और इस पर बने पुल जर्जर हो गए हैं जो दुर्घटना का कारण बनते हैं। विश्वसुंदरी पुल पर 9 जून 2019 को रेलिंग तोड़ते हुए ट्रैकर और हाइवा गिर गया। साल भर बाद भी न रेलिंग बना और न ही केबल सही हुआ। टेक्निकल कारणों से ही लठियां पुल टूट गया जो आज तक नहीं बना। जर्जर सॢवस रोड से ही गाडिय़ां गुजरती हैं। इसके अलावा अमरा अखरी पुल अधूरा छोड़ दिया है। मोहनसराय से रामनगर तक बने नए पुराने पुलों की स्थिति भी जर्जर है।

10 साल से अस्थायी टोल प्लाजा

पिछले 10 सालों से कार्यदायी संस्था की लापरवाही के कारण मात्र 8 लेन के टोल प्लाजा से काम चलाया जा रहा है जबकि गाडिय़ों की संख्या चार हजार से 18 हजार तक पहुंच गईं। 10 साल पहले यहां 10 लाख तक की वसूली होती थी जो 50 लाख तक पहुंच गई। नया टोल प्लाजा बनने से जाम भी समाप्त हो जाता। गंगा पुल पर गाडिय़ों के दबाव का खतरा भी कम होता।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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