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मां अन्‍नपूर्णा भक्‍तों पर लुटाएंगी 'अन्‍न-धन' का खजाना, काशी में माह भर बाद स्‍वर्णमयी प्रत‍िमा के भी होंगे दर्शन

By Vns Shailesh Asthana Edited By: Abhishek sharma
Published: Fri, 02 Oct 2026 03:09 PM (IST)

काशी में धनतेरस से मां अन्नपूर्णा का खजाना भक्तों के लिए खुलेगा, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन को पहुंचेंगे। तीन ...और पढ़ें

काशी में धनतेरस से खुलेगा मां अन्नपूर्णा का खजाना स्वर्ण प्रतिमा के भी होंगे दर्शन।

काशी में धनतेरस से खुलेगा मां अन्नपूर्णा का खजाना स्वर्ण प्रतिमा के भी होंगे दर्शन।

HighLights

  1. धनतेरस से काशी में मां अन्नपूर्णा का खजाना खुलेगा।

  2. तीन दिनों तक स्वर्ण प्रतिमा के दुर्लभ दर्शन होंगे।

  3. भक्तों को सुख-समृद्धि और अन्न-धन का आशीर्वाद मिलेगा।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी में धनतेरस के साथ ही मां अन्नपूर्णा का खजाना भक्तों के लिए खुल जाएगा। वर्ष में एक बार मिलने वाले इस दुर्लभ दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु काशी पहुंचेंगे। धनतेरस से शुरू होकर तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में भक्त मां अन्नपूर्णा के दरबार में धन-धान्य और सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

मान्यता है कि मां के खजाने के दर्शन और प्रसाद स्वरूप प्राप्त सिक्कों को घर में रखने से अन्न-धन की कमी नहीं होती। परंपराओं के क्रम में याचक के रूप में बाबा व‍िश्‍वनाथ की झोली भरती हैं। इसके साथ ही पांच द‍िनों तक दर्शन पूजन का क्रम चलता है।  

इस वर्ष  धनतेरस 6 नवंबर को मनाई जाएगी। इसे कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाने की मान्‍यता है। जबक‍ि इस बार त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे से शुरू होगा। इस बार धनतेरस या त्रयोदशी तिथि 7 नवंबर 2026 को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी।

इसमें पूजा का समय (प्रदोष काल) शाम लगभग 06:17 बजे से रात 08:15 बजे के बीच इस बार पड़ रहा है। इस दिन आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि और धन के देवता कुबेर देव के साथ माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन सोना, चांदी, नए बर्तन, वाहन और झाड़ू खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। धनतेरस की शाम को मृत्यु के देवता यमराज के निमित्त घर के बाहर मुख्य द्वार पर दीप जलाकर 'यमदीप'दान किया जाता है।

धनतेरस के दिन मां अन्नपूर्णा के विशेष शृंगार और पूजन के बाद खजाने का पट भक्तों के लिए खोला जाएगा। मंदिर परिसर में इस दौरान विशेष सज्जा की जाएगी। मां अन्नपूर्णा को अन्न की देवी माना जाता है और काशी की धार्मिक परंपरा में उनका विशेष स्थान है। बाबा विश्वनाथ की नगरी में दीपावली पर्व की शुरुआत भी मां अन्नपूर्णा के दर्शन के साथ जुड़ी हुई है। काशी में मां अन्‍नपूर्णा की स्‍वर्ण प्रत‍िमा का भी दर्शन इस दौरान वर्ष में तीन द‍िनों तक होता है।  

तीन दिनों तक मंदिर में श्रद्धालुओं की कतार लगी रहेगी। दूर-दराज से आने वाले भक्त मां के दर्शन के साथ खजाने का प्रसाद पाने के लिए उत्सुक रहेंगे। मंदिर प्रशासन की ओर से दर्शन व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए आवश्यक तैयारियाें का खाका खींचा जाने लगा है। भीड़ को देखते हुए प्रवेश और निकास की व्यवस्था, बैरिकेडिंग तथा सुरक्षा के इंतजाम किए जाएंगे।

अन्नपूर्णा के खजाने की अपनी परंपरा
काशी में मां अन्नपूर्णा के खजाने का दर्शन दीपावली पर्व की विशिष्ट धार्मिक परंपराओं में शामिल है। मंदिर में मां के समक्ष स्वर्ण-रजत सिक्के और अन्य प्रतीकात्मक धन-संपदा अर्पित की जाती है। भक्त इन्हें समृद्धि के प्रतीक के रूप में ग्रहण करते हैं।

मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा की कृपा से घर में अन्न और धन का भंडार भरा रहता है। प्रत्येक दर्शनार्थी को मां की तरफ से मंदिर के महंत शंकर पुरी अन्न व सिक्का भेंट प्रसाद के रूप में प्रदान करते हैं, जिन्हें ले जाकर भक्त अन्न को अपने अन्नागार और सिक्के को तिजोरी में रखते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है ऐसा करने से उनके घर में कभी अन्न-धन की कमी नही होती।

दर्शन के लिए उमड़ती है अपार भीड़
धनतेरस से दीपावली तक काशी में पहले ही श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगती है। ऐसे में मां अन्नपूर्णा के खजाने का दर्शन इस आस्था को और गहरा कर देता है। तीन दिनों तक मंदिर क्षेत्र में धार्मिक उल्लास का माहौल रहेगा। मां के दरबार में पहुंचने वाले भक्त अन्न, धन और परिवार की सुख-समृद्धि की मंगलकामना के साथ दीपोत्सव का स्वागत करेंगे।