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बीएचयू में चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग को लेकर एबीवीपी सदस्‍यों ने क‍िया हंगामा

By Uttam Roy ChoudharyEdited By: Abhishek sharma
Published: Wed, 23 Sep 2026 01:51 PM (IST)

काशी हिंदू विश्वविद्यालय में एबीवीपी सदस्यों ने चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग को लेकर केंद्रीय कार्यालय के सामने प्रदर्शन ...और पढ़ें

HighLights

  1. एबीवीपी ने बीएचयू में चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग पर प्रदर्शन किया।

  2. केंद्रीय कार्यालय के सामने प्रदर्शन, सुरक्षा कर्मियों से हुई झड़प।

  3. छात्रों की समस्याओं पर प्रशासन की अनदेखी का आरोप, आंदोलन जारी रहेगा।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में बुधवार की दोपहर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों ने चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग को लेकर हंगामा किया। इस दौरान एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया और बैनर-पोस्टर के माध्यम से अपनी मांगें रखीं। उन्होंने चीफ प्रॉक्टर को हटाने और नए प्रॉक्टर की नियुक्ति की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी के सदस्यों और सुरक्षा कर्मियों के बीच झड़प भी हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस को सूचित किया। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। इस बीच, एबीवीपी के कार्यकर्ता वहीं धरना देते रहे और नारेबाजी करते रहे।

इस हंगामे के कारण परिसर का माहौल एक बार फिर गरमाने लगा है। एबीवीपी के सदस्यों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चीफ प्रॉक्टर की कार्यशैली से छात्र समुदाय में असंतोष बढ़ रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें पूरी नहीं होने तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। एबीवीपी के नेताओं ने कहा कि वे छात्रों के हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे। इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

इस घटना ने विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति को एक बार फिर से सक्रिय कर दिया है। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे छात्रों की आवाज उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और किसी भी प्रकार की दमनकारी नीतियों का विरोध करेंगे।

बीएचयू में एबीवीपी का यह प्रदर्शन न केवल चीफ प्रॉक्टर के खिलाफ है, बल्कि यह छात्रों की समस्याओं को उठाने का एक प्रयास भी है। विश्वविद्यालय प्रशासन को अब इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना होगा, ताकि छात्रों के बीच बढ़ते असंतोष को कम किया जा सके।

इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छात्र संगठनों की भूमिका विश्वविद्यालयों में महत्वपूर्ण है और उनकी आवाज को अनसुना नहीं किया जा सकता। एबीवीपी का यह हंगामा आने वाले दिनों में और भी चर्चा का विषय बनेगा।