वाराणसी (जेएनएन) । दुनिया में कुश्ती ही ऐसा खेल है जहां एक इंसान दूसरे इंसान से लड़ता है बीच में कोई माध्यम नहीं होता है। जबकि क्रिकेट में खेल के दौरान बैट व बाल, फुटबॉल में बाल और हॉकी में स्टिक व बॉल माध्यम होते है। कुश्ती का इतिहास हजारों साल पुराना है। उसे उस रूप में दिखाना बहुत कठिन काम है। पहले फिल्मों में पहलवानों के चरित्र को कामेडियन के रूप में अधिक दिखाया जाता रहा है। मगर दंगल फिल्म में आमिर खान का नजरिया शुरू से साफ था कि सभी दांव असली लगे न कि कम्प्यूटर से बने।

अर्जुन अवार्डी पहलवान कृपा शंकर पटेल ने सोमवार को बताया कि भारतीय कुश्ती संघ ने भी आमिर को निर्देश दिया था कि फिल्मों में कहीं से भी कोई दांव फ्राड न लगे। कृपाशंकर ने बताया कि आमिर खान ने पहले मुझे 10 हीरोइनों से मिलवाया और कहां कि आप इनमें से तीन को चुन लें। बड़ी मुश्किल से मैंने तीन को चुना। उसके बाद मैने इनके लिए नौ महीने का शेडूयल बनाया गया। मुंबई के साई सेंटर में इनको मेरी देखरेख में तीन से चार घंटे पसीना बहाना पड़ता था। आठ महीने के बाद इनको रोजना एक-एक दांव 20 से 30 बार लगाना पड़ता था। अमेरिकन डाइटीशियन की भी मदद ली गई।

एक दिन आमिर खान साई सेंटर आए और वहां पर हीरोइनों को अभ्यास करते देख उन्होंने घोषणा की फिल्म निर्माण के दौरान वह शराब और सिगरेट को हाथ नहीं लगाएंगे। मेरे लिए सब बड़ा चैलेंज था कि आमिर उस समय ओवरवेट थे उनका वजन कम करना था जबकि हीरोइनों का वजन कम था, उनको पहलवान के साइज में लाना था। सबसे अच्छा तब लगता था जब हीरोइनें कुश्ती की थकान से परेशान हो जाती थीं। उस समय उनका नखरा देखने लायक होता था। खैर एक साल की मेहनत के बाद शूटिंग शुरू हुई। कृपा का कहना है कि हार को जब तक आप चैलेंज के रूप में नहीं लेंगे तब तक आप चैंपियन नहीं बन सकते हैं। कुश्ती में आना है तो पहले जिम्नास्टिक सीखें। शक्ति, भक्ति और ब्रहमचर्य से कुश्ती सीखेंगे तो आप हमेशा बेहतर परिणाम देंगे।

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