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केंद्रीय कारागार वाराणसी के बंदियों की अनोखी रामलीला, पहले द‍िन नारद मोह की लीला का मंचन

By Rakesh SrivastavaEdited By: Abhishek sharma
Published: Sun, 11 Oct 2026 05:46 PM (IST)

केंद्रीय कारागार वाराणसी में नवरात्र के पहले दिन बंदियों ने दस दिवसीय रामलीला का शुभारंभ किया। पहले दिन नारद मोह ...और पढ़ें

HighLights

  1. वाराणसी केंद्रीय कारागार में बंदियों की रामलीला शुरू।

  2. नवरात्र के प्रथम दिन नारद मोह का मंचन।

  3. नारद के अहंकार और श्रीराम प्राकट्य की कथा।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। केंद्रीय कारागार में नवरात्र के प्रथम दिन शनिवार को बंदियों द्वारा मंचित दस दिवसीय रामलीला का शुभारंभ मुकुट पूजन के साथ हुआ। पूजन के बाद पहले दिन नारद मोह की लीला का मंचन किया गया। इसमें कामदेव द्वारा नारद की समाधि भंग करने के असफल प्रयास से लेकर भगवान विष्णु की माया और भगवान राम के प्राकट्य तक की कथा प्रस्तुत की गई।

लीला में दिखाया गया कि नारद की समाधि भंग करने में असफल रहने पर कामदेव उनके चरणों में गिरकर क्षमा मांगते हैं। इससे नारद को अपनी काम पर विजय का अहंकार हो जाता है। वह यह प्रसंग भगवान शिव को सुनाते हैं। शिव उन्हें भगवान विष्णु से यह बात न बताने की सलाह देते हैं, लेकिन नारद अभिमानवश विष्णु को भी यह समाचार सुना देते हैं।

नारद का अहंकार दूर करने के लिए भगवान विष्णु माया रचते हैं। इसके प्रभाव में नारद राजा शीलनिधि की कन्या पर मोहित हो जाते हैं और विष्णु से अपने लिए उनके जैसा रूप मांगते हैं। विष्णु उन्हें वानर का रूप दे देते हैं, जिससे उनकी खूब हंसी उड़ती है। क्रोधित नारद विष्णु को मनुष्य रूप में नारी विरह में भटकने और वानरों द्वारा सहायता मिलने का श्राप देते हैं।

इसके बाद भगवान राम अपने अंशों सहित अयोध्या में महाराज दशरथ के यहां प्रकट होते हैं। इसी प्रसंग के साथ पहले दिन की लीला समाप्त हुई।इस अवसर पर वरिष्ठ चिकित्साधिकारी लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, चिकित्साधिकारी अभिषेक सिंह, जेलर अखिलेश कुमार, डिप्टी जेलर अखिलेश कुमार मिश्र, अमित कुमार वर्मा, अशोक कुमार राय, अयोध्या प्रसाद, भोजराज, फार्मासिस्ट संदीप खरे और अमिता श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।