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बीएचयू में गंगातीरी सरोगेट गाय ने 24 किलोग्राम वजन की एक स्वस्थ साहीवाल बछिया को द‍िया जन्म

By Digital Desk Edited By: Abhishek sharma
Published: Fri, 21 Aug 2026 03:26 PM (IST)

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा संकाय ने भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक से गंगातीरी सरोगेट गाय द्वारा 24 किलो की स्वस्थ ...और पढ़ें

बीएचयू में भ्रूण प्रत्यारोपण से गंगातीरी सरोगेट गाय ने दिया साहीवाल बछिया को जन्म।

बीएचयू में भ्रूण प्रत्यारोपण से गंगातीरी सरोगेट गाय ने दिया साहीवाल बछिया को जन्म।

HighLights

  1. बीएचयू में गंगातीरी सरोगेट गाय ने साहीवाल बछिया को जन्म दिया।

  2. भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक और सेक्स-सॉर्टेड सीमन का उपयोग किया गया।

  3. यह स्वदेशी गोवंश के आनुवंशिक सुधार में महत्वपूर्ण कदम है।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर स्थित पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय ने स्वदेशी गोवंशीय नस्लों के संरक्षण एवं आनुवंशिक सुधार के लिए संचालित राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत सहायक प्रजनन तकनीक परियोजना के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

21 अगस्त 2026 को, भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक और सेक्स-सॉर्टेड सीमन के माध्यम से एक गंगातीरी सरोगेट गाय ने 24 किलोग्राम वजन की एक स्वस्थ साहीवाल बछिया को जन्म दिया। यह बछिया प्रतिदिन 14–16 लीटर दूध उत्पादन करने की क्षमता रखती है, जो कि उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले साहीवाल स्रोत से उत्पन्न हुई है।

इस बछिया के जन्म के लिए 11 नवंबर 2025 को एक उच्च दुग्ध उत्पादन वाली साहीवाल गाय में सुपरओव्यूलेशन कराया गया था। इसके बाद, एक श्रेष्ठ साहीवाल सांड के सेक्स-सॉर्टेड सीमन से कृत्रिम गर्भाधान किया गया, जिससे छह उच्च गुणवत्ता वाले भ्रूण प्राप्त हुए। इन भ्रूणों को सिंक्रोनाइज्ड रिसिपिएंट गायों में प्रत्यारोपित किया गया।

यह परियोजना डॉ. मनीष कुमार के नेतृत्व में संचालित की जा रही है, जिसमें डॉ. कौस्तुभ किशोर सराफ और डॉ. अजीत सिंह सह-प्रधान अन्वेषक के रूप में कार्यरत हैं। इस अवसर पर बीएचयू के वित्त अधिकारी डॉ. मनोज कुमार पांडेय और कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. वी. के. मिश्रा ने सरोगेट गाय और नवजात बछिया का निरीक्षण किया। उन्होंने फार्म की प्रबंधन व्यवस्थाओं की समीक्षा की और शोध दल के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने परियोजना को और मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित किया। पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता डॉ. अमित राज गुप्ता और राजीव गांधी दक्षिणी परिसर के प्रभारी प्रोफेसर डॉ. बी. एम. एन. कुमार ने कहा कि सहायक प्रजनन तकनीक का सफल उपयोग आनुवंशिक सुधार की गति बढ़ाने, दुग्ध उत्पादन एवं पशुधन की गुणवत्ता में वृद्धि करने तथा किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने स्वदेशी गोवंश के संरक्षण एवं आनुवंशिक उन्नयन के लिए टीम के प्रयासों की सराहना की। पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय की टीम अगले चरण में ओवम पिक-अप, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन एवं एम्ब्रियो ट्रांसफर जैसी उन्नत तकनीक को अपनाने की दिशा में प्रयासरत है।

इस तकनीक को विंध्य क्षेत्र के पशुपालकों तक पहुंचाने की योजना है, जिससे गंगातीरी सहित अन्य स्वदेशी गोवंशीय नस्लों का तेजी से आनुवंशिक सुधार किया जा सके और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिले। यह उपलब्धि उन्नत प्रजनन तकनीकों के माध्यम से उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले स्वदेशी गोवंश की संख्या बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस प्रकार की परियोजनाएं न केवल पशुधन की गुणवत्ता में सुधार करती हैं, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि करती हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। इस दिशा में किए गए प्रयासों से भारतीय कृषि और पशुपालन क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद की जा सकती है।