वाराणसी : नागरीप्रचारिणी सभा के पूर्व प्रधानमंत्री व पूर्व सांसद सुधाकर पाण्डेय हिन्दी के अप्रतिम योद्धा थे। उनकी दृष्टि में हिन्दी की सेवा ही राष्ट्र सेवा थी। उनकी साहित्य साधना को और आगे ले जाने की जरूरत है।

नागरी प्रचारिणी सभा में बुधवार को सुधाकर पाण्डेय की पुण्यतिथि पर आयोजित स्मृति सभा में यह विचार वक्ताओं ने व्यक्त किए। इसी के साथ एक प्रस्ताव के माध्यम से नगर में महाकवि जयशंकर प्रसाद की प्रतिमा लगाने की मांग भी की गई।

मुख्य अतिथि प्रो. गिरीश चंद चौधरी ने कहाकि भारतेंदु हरिश्चंद्र के आदर्श सुधाकर जी के व्यक्तित्व व कृतित्व में देखी जा सकती है। साहित्यकार पं.धर्मशील चतुर्वेदी ने कहा पं.सुधाकर पांडेय ने साहित्य के अप्रतिम योद्धा के रूप में श्रेष्ठ साहित्य का सृजन किया। नवगीतकार पं. श्रीकृष्ण तिवारी ने कहा कि वे जितने बड़े साहित्यकार थे उतने ही बड़े मनुष्य भी थे। बनारस का खांटीपन उनमें विद्यमान था। सभा के प्रधान मंत्री डॉ. पद्माकर पाण्डेय ने कहा कि सभा के महान उन्नायकों की विरासत की रक्षा व हिन्दी सेवा के लिए हम संकल्पित हैं। इस दौरान डा.भगवन्ती सिंह, हिमांशु उपाध्याय, डा.अत्रि भारद्वाज, डा.रामअवतार पांडेय, डा. पवन कुमार शास्त्री, डॉ. उदय प्रताप सिंह, विनय कुमार दुबे,जवाहर लाल शास्त्री, डा. अशोक कुमार सिंह, परमानंद आनंद, अब्दुल अजीज, डा.राम प्रकाश शाह, चंद्रबली शास्त्री, नरेन्द्र नाथ मिश्र आदि ने विचार व्यक्त किए। संचालन डॉ. जितेंद्र नाथ मिश्र व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कुसुमाकर पाण्डेय ने किया। इस मौके पर आयोजित काव्यंाजलि में अनेक कवियों ने अपनी रचनाएं पढीं। साथ ही संगीतांजलि का कार्यक्रम विजय मिश्र बुद्धिहीन के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ।

पं.सुधाकर पांडेय स्मृति सभा में डा. अत्रि भारद्वाज के प्रस्ताव पर नागरी प्रचारिणी सभा ने सर्वसम्मति से शासन प्रशासन से अनुरोध किया कि काशी के गौरव ंव आधुनिक युग के सबसे बड़े प्रतीक महाकवि जयशंकर प्रसाद की प्रतिमा नगर में उपयुक्त स्थान पर स्थापित की जाय।

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