वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट परिक्षेत्र में इस वर्ष 725 दुर्गा प्रतिमाओं की होगी स्थापना, मूर्तियां सप्ताह भर बाद पहुंचने लगेंगी पंडाल
वाराणसी में शारदीय नवरात्र के लिए दुर्गा पूजा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, इस वर्ष कमिश्नरेट क्षेत्र में लगभग ...और पढ़ें

वाराणसी में इस बार 725 दुर्गा प्रतिमाएं होंगी स्थापित, पंडालों में दिखेगी भक्ति और प्रकृति का संगम।
HighLights
वाराणसी में इस वर्ष 725 दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित होंगी।
बंगाल के शिल्पकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं।
'भक्ति का रंग, प्रकृति के संग' संदेश प्रमुख रहेगा।
शैलेश अस्थाना, जागरण, वाराणसी। शारदीय नवरात्र में इस बार काशी में मां दुर्गा की भक्ति का रंग और गाढ़ा होगा। दुर्गा पूजा समितियों के साथ मूर्तिकारों की कार्यशालाओं में भी तैयारियां अंतिम दौर में हैं। कमिश्नरेट क्षेत्र में इस वर्ष लगभग 725 दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना की तैयारी है। लगभग 30 नए स्थानों पर भी पूजनोत्सव के आयोजन होंगे।
केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति के अनुसार शहर में 512 सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिमाएं स्थापित होती हैं। कहा जाता है कि कोलकाता के बाद काशी में दुर्गोत्सव ने एक बड़े लोकपर्व के रूप में मनाया जाता है। ध्यान इस बात का रखना है कि भक्ति का रंग प्रकृति के संग गाढ़ा हो, उल्लास का धमाल मचे लेकिन पर्यावरण का भी ख्याल रहे। आज से आरंभ दैनिक जागरण के 10 दिनी समाचार अभियान लक्ष्य बस इसी बात का जागरण होगा।
बंगाल के हाथों में काशी की आस्था का आकार : मूर्ति निर्माण में पारंपरिक बांग्ला चाल से लेकर आधुनिक और थीम आधारित प्रतिमाओं तक प्रयोग किए जा रहे हैं। मूर्ति निर्माण की प्रक्रिया में अलग-अलग विशेषज्ञ कारीगरों की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि हर वर्ष पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में शिल्पकार यहां पहुंचते हैं।
अभिजीत विश्वास के कारखाने में इस समय 16 कारीगर काम कर रहे हैं, जिनमें नौ पश्चिम बंगाल के हैं। उनके अनुसार पूरे शहर में इस मौसम में करीब 50-60 बंगाली कारीगर आने की संभावना है। काशी में इससे पहले भी बंगाल से आए कलाकारों के हाथों प्रतिमाओं को आकार देने की परंपरा रही है।
उत्सव के बाद विसर्जन की चुनौती : उत्सव के बाद प्रतिमाओं के विसर्जन की चुनौती भी सामने होगी। पिछले वर्ष नगर में 12 विसर्जन स्थलों की व्यवस्था की गई थी, जबकि इस बार प्रशासन ने कई कुंड-तालाब चिह्नित किए हैं। समितियों ने कुछ स्थलों पर पानी और सफाई की स्थिति को लेकर सवाल भी उठाए हैं। इस तरह दुर्गोत्सव सिर्फ चार दिनों की पूजा नहीं, बल्कि काशी की अर्थव्यवस्था, शिल्प परंपरा और बंगाल-काशी की सांस्कृतिक साझेदारी का भी बड़ा उत्सव है। भक्ति गीतों, ढाक की थाप और पंडालों की रोशनी के बीच मां की प्रतिमाएं ‘भक्ति का रंग, प्रकृति के संग’ का संदेश भी देंगी।
भक्ति के धमाल में किरहिया स्थित शीतल मूर्ति केंद्र में मां दुर्गा की प्रतिमा के निर्माण में लगे मूर्तिकार। पूजनोत्सव की इस बार खास तैयारी है। 695 स्थानों पर बीते वर्ष स्थापित की गई थीं मां दुर्गा की प्रतिमाएं। 725 स्थानों पर इस वर्ष प्रतिमा स्थापना की है संभावना। 228 स्थानों बने अस्थायी तालाबों में किया गया था प्रतिमा विसर्जन। 693 स्थानों पर स्थापित प्रतिमाओं का किया गया था विसर्जन।
