विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

70 वर्ष तक डाक्टर कर सकेंगे नौकरी, वाराणसी के इन च‍िकित्‍सकाें को म‍िल सकता है फायदा

By Shivam SinghEdited By: Abhishek sharma
Published: Wed, 09 Sep 2026 02:57 PM (IST)

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर अब सरकारी डॉक्टर 65 की बजाय 70 वर्ष की आयु तक सेवा दे ...और पढ़ें

सरकारी डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु 70 वर्ष हुई वाराणसी के चिकित्सकों को मिलेगा लाभ।

सरकारी डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु 70 वर्ष हुई वाराणसी के चिकित्सकों को मिलेगा लाभ।

HighLights

  1. सरकारी डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु 70 वर्ष तक बढ़ी।

  2. उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर हुआ यह फैसला।

  3. अनुभवी चिकित्सकों का लाभ मरीजों को, ग्रामीण स्वास्थ्य मजबूत होगा।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। सरकारी डाक्टरों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने सेवानिवृत्ति के बाद योग्य चिकित्सकों को 70 वर्ष की आयु तक पुनर्नियुक्ति का अवसर देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अभी डाक्टर 65 वर्ष तक सेवा दे रहे हैं।

जल्द ही अपर मुख्य सचिव स्तर से औपचारिक आदेश जारी होने की उम्मीद है। इससे अनुभवी चिकित्सकों का लाभ मरीजों को लंबे समय तक मिल सकेगा। वाराणसी जिले में भी कई डाक्टर इस नई व्यवस्था का फायदा उठा सकेंगे। सीएमओ कार्यालय से संबंधित दो डाक्टर डा. राहुल सिंह और डा. आरके सिंह पहले से पुनर्नियोजन पर हैं।

वरिष्ठ परामर्शदाता डा. एलके त्रिपाठी नवंबर में रिटायर्ड होने वाले हैं। नई नीति लागू होने के बाद वे भी 70 वर्ष तक सेवा जारी रख सकते हैं। मंडलीय चिकित्सालय में डा. एसपी सिंह, डॉ. ओपी सिंह और डा. सीपी कश्यप पुनर्नियोजन पर कार्यरत हैं। पं. दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में डा. एके मौर्या, डा. जेसी द्विवेदी, डा. शक्ति वसु, डा. जयगोविंद, डा. बी राम, डा. अर्चना सिंह, डा. पीके राय और डा. आरएस राम इसकी श्रेणी में शामिल हैं।

लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सालय में डा. एसके गुप्ता, डा. बीएम सिंह, डा. सुबोध सिन्हा और डा. आरबी सरन भी लाभ ले सकते हैं। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग स्वास्थ्य विभाग का प्रमुख संवर्ग है। इसमें चिकित्सा अधिकारी और विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल हैं, जो सरकारी अस्पतालों, सीएचसी व पीएचसी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं।

सेवानिवृत्ति के बाद अनुभवी चिकित्सकों को 70 वर्ष तक सेवा का मौका मिलने से उनके लंबे अनुभव का सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा। विशेषज्ञों की कमी वाले विभागों में यह व्यवस्था खासतौर पर कारगर साबित होगी। ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं भी मजबूत होंगी।