मऊ, जेएनएन। नगर में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध को लेकर हुए बवाल के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। इस मामले में बुधवार सुबह तक 48 को गिरफ्तार कर लिया गया है। थाना दक्षिणटोला व नगर कोतवाली में 175 लोगों के खिलाफ  उपद्रव करने और हिंसा फैलाने तथा तोडफ़ोड़ व आगजनी करने के आरोपों में नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। जबकि 1150 अज्ञात लोगों को भी मुकदमे की जद में लिया गया है। सीसी टीवी फुटेज से उपद्रव करने वालों को पुलिस खंगाल रही है।

हाई अलर्ट के बावजूद जिला प्रशासन की नहीं थी कोई तैयारी

नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर जब पूरे देश में विरोध के स्वर गूंज रहे थे। लगभग संपूर्ण विपक्षी राजनीतिक दल और अल्पसंख्यक समुदाय मुखर रूप से विरोध में था। देश की राजधानी दिल्ली, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, मेरठ, जामिया मिल्लिया आदि में हिंसा शुरू हो चुकी थी, केंद्र सरकार से लगायत राज्य सरकार तक ने हाई अलर्ट घोषित कर रखा था तो ऐसी दशा में अति संवेदनशील जनपद की श्रेणी में आने वाले मऊ का प्रशासन किस तरह से संवेदनहीन बना रहा। यह समझ से परे है। हाई अलर्ट को लेकर कहीं कोई तैयारी न होने से जिले का खुफिया तंत्र भी सोता रहा। ऐसी हालत में अराजक तत्वों की मानसिकता और सोशल मीडिया पर चल रही उनकी तैयारियों को पढ़ पाने या भांप पाने में प्रशासन पूरी तरह फेल रहा।

 

 

शहर में इंटरनेट सेवाएं और ब्राडबैंड पर रोक

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद शहर में उपजे हालात को देखते हुए जनपद में इंटरनेट सेवाएं बाधित कर दी गई हैं। प्रशासन के आग्रह पर शासन के निर्देशानुसार बीएसएनएल के वाराणसी कार्यालय से शहर के 22 बीटीएस को चिह्नित करते हुए उनसे इंटरनेट व ब्राडबैंड सेवा बंद कर दी गईं। इसके अलावा वाई-मैक्स, वाई-फाई, एफटीटीएच सेवाएं भी बाधित कर दी गईं। हालांकि बाद में बीएसएनएल ने पूरे जिले में इंटरनेट सेवाओं को ठप कर दिया, जबकि निजी कंपनियों के नेट चलते रहे।

खाली कराए गए मदरसे

नागरिकता संसोधन कानून (सीएए) के विरोध में सोमवार को सैकड़ों की तादात में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने सड़कों पर उतर कर जो उपद्रव उसी के तहत जिलाधिकारी ने प्राथमिक से लेकर इंटर कालेज तक के विद्यालयों को बंद करने का आदेश दिया। वहीं मदरसों में बाहर से पढऩे आए छात्रों को तुरंत खाली करने का निर्देश मदरसों के मौलवियों को दिया गया।

गैर जनपदों से पहुंची भारी फोर्स, 'यलो स्कीम' लागू

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के चलते नगर क्षेत्र में हुई हिंसा के बाद शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार की शाम हुई हिंसक घटना, आगजनी के बाद अघोषित कफ्र्यू लागू कर दिया गया। हालात पर नजर रखने व सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त के लिए शासन ने एडीजी अभियोजना आशुतोष पांडेय को मऊ भेज दिया है। साथ ही सुरक्षा के लिए आरएएफ, पीएसी की चार कंपनी फोर्स तैनात कर दी गई है। जिले में हाई अलर्ट लागू करते हुए 'यलो स्कीम' लगा दी गई है। साथ ही बगल के जनपदों से अपर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में पुलिस दस्ता भी मऊ में देर रात से ही मोर्चा संभाल लिया है। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंगलवार को नगर शांत रहा। कहीं भी कोई विरोध का स्वर नहीं फूटा।

 

विहिप ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र

विश्व हिंदू परिषद की बैठक संगठन के कार्यालय पर मंगलवार को हुई। इसमें जनपद में सीएए के विरोध की आड़ में हुई हिंसा को राजनीति से प्रेरित बताते हुए इसके लिए जिम्मेदारों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। बैठक में प्रांत सहमंत्री शैलेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि शहर के प्रमुख राजनेता हमेशा शांति-व्यवस्था को बिगाडऩे की कोशिश में लगे रहते हैं। पहले भी अनेक मामलों में उनका नाम आ चुका है। इस बार की हिंसा में भी उनकी संलिप्तता खुले तौर पर जाहिर होती है। प्रशासन को उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। इस संबंध में संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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