मऊ : पूर्व संप्रग सरकार के इंदिरा आवास को बंद कर शुरू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना पहले ही दौर में अपात्रों के चंगुल में जकड़ी दिखी। हकीकत यह है कि वित्तीय वर्ष 2016-17 व 17-18 के 418 आवास अभी भी अधूरे हैं। इसमें अपना गला फंसता देख विभाग ने अपात्रों को चिह्नित कर 16 लाभार्थियों की धनराशि शासन को वापस लौटा दिया तो कई दर्जन लाभार्थियों को नोटिस जारी की गई है। 115 आवास के लाभार्थी तो ऐसे रहे कि वे पहली किश्त के रूप में 40 हजार की धनराशि तो ले लिया परंतु इसके बाद द्वितीय किश्त की माग तक नहीं किया। लगभग आधा प्रधानमंत्री आवास अपात्रों के खाते में ही चला गया। अब ग्राम्य विकास अभिकरण आवासों को पूर्ण कराने के लिए प्रतिदिन मानीटरिंग करने का दावा कर रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गावों के गरीबों को पक्की छत मुहैया कराया जाना था। इसका मानक था कि 2011 की सामाजिक, आर्थिक, जातिगत जनगणना के आधार पर पात्रता सूची के लाभार्थियों को आवास दिया जाना था। जब आवास का लक्ष्य मिला और आवास देने की प्रकिया शुरू हुई तो लगभग हर गावों में पात्रता की एक जैसी ही स्थिति मिली। इसमें जहा बहुतेरे अपात्र सूची में शामिल हो गए तो गरीब को स्थान ही नहीं मिला। इसके चलते गरीब आज भी आवासीय योजना से वंचित है। उधर सूची में शामिल लोगों को धड़ाधड़ आवास आवंटित किए जाने लगे। आए दिन शासन भी इसकी मानीटरिंग करता रहा। लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपात्रों को भी आवास का लाभ बड़े पैमाने पर दे दिया गया। इसमें वसूली के भी आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे। इधर आलम यह है कि लाख कवायदों के बाद भी 418 आवास आज तक पूर्ण नहीं हो पाए। इसके पीछे कारण रहा कि अधिकतर अपात्रों ने आवास का पैसा तो ले लिया परंतु आवास बनवाया ही नहीं। अब ग्राम्य विकास अभिकरण ने कार्रवाई शुरू की है। आवास

10163-कुल आवास

10045-आवासों को दूसरी किश्त जारी

9751-आवासों को जारी हुई तीसरी किश्त

9745- आवास हुए पूर्ण प्रधानमंत्री आवास योजना में किसी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अभी लगभग 400 आवास अधूरे है। इसमें कुछ अपात्र चयनित हुए तो कुछ पहली किश्त लेकर बाहर चले गए। कई ऐसे भी हैं जिनके खाते की लिमिट छोटी होने के चलते धनराशि नहीं जा पा रही है। कुछ लाभार्थी मृत हो गए। इन आवासों को पूर्ण कराने के लिए प्रतिदिन मानीटरिंग की जा रही है।

-एमएन त्रिवेदी, परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास अभिकरण।

Posted By: Jagran

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