काशी में सनकादिक चरित्र बाग बिहार लीला, भोर में महाआरती के साथ 33 दिवसीय लीला को विश्राम
शिवपुर की 33 दिवसीय श्रीरामलीला का समापन सनकादिक चरित्र बाग बिहार लीला के मंचन के साथ हुआ। इस दौरान राम-भरत ...और पढ़ें
HighLights
शिवपुर की 33 दिवसीय श्रीरामलीला का हुआ समापन।
सनकादिक चरित्र बाग बिहार लीला का मंचन।
राम-भरत संवाद, यादव जी की लीला का प्रदर्शन।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। शिवपुर की अति प्राचीन 33 दिवसीय श्री रामलीला के आखिरी दिन बुधवार को श्री रामचरितमानस की चौपाइयों और दोहों के बीच सनकादिक चरित्र बाग बिहार लीला का मंचन बाल स्वरूप पात्रों द्वारा बड़े ही भावपूर्ण ढंग से किया गया। इसी आयोजन के साथ लीला को विश्राम भी मिलता है।
लीला में हनुमान जी श्री रामचंद्र जी से कहते हैं कि भैया भरत भैया आपसे कुछ पूछना चाहते हैं परंतु संकोच के कारण नहीं पूछ पा रहे हैं। प्रभु राम की आज्ञा पाकर भरत पूछते हैं कि हे प्रभु संत तथा असंत दोनों में क्या अंतर है। जिस पर प्रभु राम भरत समेत सभी भाइयों को असंत का लक्षण बताते हुए कहते हैं कि झूठ ही लेना, झूठ ही देना, झूठ ही भजन झूठ चबेना, असंत व्यक्ति दूसरों की विपत्ति को देखकर प्रसन्न होते हैं। लेकिन संत दूसरों की विपत्ति देखकर उसकी सहायता करते हैं।
इसके पश्चात प्राचीन रामलीला मे प्रसिद्ध यादव के पाठ का मंचन देख सभी श्रोता हर्षित हो उठे। गुरु गुड़ ही रह गए चेला चीनी हो गया- यादव जी की लीला मंचन में एक महात्मा चारों धाम की यात्रा पर जाने से पूर्व अपने कोठारी को कहते हैं कि कोई ऐसा व्यक्ति ढूंढ कर लाओ जो आश्रम में सुबह-शाम ठाकुर जी की पूजा अर्चना अच्छे से कर सके। कोठारी को रास्ते में एक यादव जी भैंस चराते हुए मिल जाते हैं।
कोठारी यादव जी को भोजन का लालच देकर आश्रम में पूजा पाठ के लिए ले आते हैं। यादव जी को समझाया जाता है कि आपको भोजन करने के लिए भरपेट खाने की सामग्री मिलेगी परंतु पहले आप स्नान करेंगे फिर आंख बंद करके घंटी बजाते हुए ठाकुर जी को भोग लगाएंगे। यादव जी बेचारे कहते हैं कि मैं तो बस पैदा होने के 6 दिन बाद ही नहाया था अब कहां से नहाउंगा।
फिर भी कोठारी से थाली भरकर भोजन लेने के पश्चात यादव जी थोड़ा जल छिड़क कर आंखें बंद करते हैं और घंटी बजाते हुए अपनी भाषा में ठाकुर जी को भोग लगाना प्रारंभ करते हैं। कुछ पल के पश्चात जब यादव जी आंखें खोलते हैं तो पूरा भोग गायब मिलता है। कई बार कोठारी के भोग देने के पश्चात जब बार-बार भोग गायब होने लगता है तो इस बार यादव जी अपने नेत्र खोलकर घंटी बजाते हैं।
इसके बाद प्रभु श्री राम अपने चारों भाइयों और हनुमान के साथ उनके थाली से जैसे ही भोग उठाते हैं वैसे ही यादव जी उन सारे लोगों को पकड़ लेते हैं और कोठारी को आवाज देते हैं आज चोर पकड़ा गया। तभी आश्रम के संत आ जाते हैं और यादव जी को प्यार से समझाते हैं कि मैंने कितने वर्षों की भक्ति के बाद भी भगवान को नहीं पाया और तुमने पल भर की सच्ची भक्ति के कारण आज हम सभी को भगवान का दर्शन कर दिया। इसी के साथ ही भोर की महाआरती के पश्चात 33 दिवसीय शिवपुर की रामलीला को विश्राम दिया गया। लीला में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
