जागरण संवाददाता, वाराणसी : संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में करीब 300 फाइलें जांच की जद में हैं। इसमें संबद्ध महाविद्यालयों में नियुक्ति की फाइलें भी शामिल हैं। पिछले डेढ़ माह में इन फाइलों का निस्तारण बतौर कुलसचिव प्रो. सुधाकर मिश्र ने किया था। कुलसचिव प्रभाष द्विवेदी ने प्रो. मिश्र के कार्यकाल में किए गए सभी कार्यो की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। करीब डेढ़ माह भीतर उन्होंने गुरुवार को दोबारा कुलसचिव पद पर ज्वाइन कर लिया। ऐसे में विश्वविद्यालय में कुलसचिव को लेकर चल रही अनिश्चितता अब खत्म हो गई है।

कुलपति प्रो. यदुनाथ दुबे ने पांच अक्टूबर को प्रभाष द्विवेदी को हटाकर वेदांत विभाग के प्रो. सुधाकर मिश्र को कुलसचिव का दायित्व सौंप दिया था। कार्यहित में प्रभाष द्विवेदी को उप कुलसचिव पद का दायित्व सौंप दिया था। दरअसल कुलसचिव प्रभाष द्विवेदी अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया का विरोध कर रहे थे। अंतत: राजभवन ने भी विश्वविद्यालय में चल रहे नियुक्तियों को अनियमित मानते हुए रोक लगा दी। इस क्रम अध्यापकों व कर्मचारियों के दबाव में कुलपति ने प्रभाष द्विवेदी को दोबारा कुलसचिव पद की जिम्मेदारी सौंप दी। कुलसचिव प्रभाष द्विवेदी का कहना है कि किसी अध्यापक को कुलसचिव बनाने का अधिकार कुलपति को नहीं है। ऐसे में बतौर कुलसचिव प्रो. सुधाकर मिश्र द्वारा किए गए कार्य भी शासन की दृष्टि से वैध नहीं हैं। इसे देखते हुए उनके द्वारा किए गए कार्यो की समीक्षा की जाएगी। इस दौरान महाविद्यालयों में नियुक्ति के लिए किए गए अनुमोदन भी रद किए जाएंगे।

शासन स्तर पर भी जांच जल्द

कुलसचिव प्रभाष द्विवेदी ने विश्वविद्यालय में अनियमितताओं की रिपोर्ट शासन को भी भेजी है। रिपोर्ट में स्वयं व कुलपति द्वारा किए गए कार्यो की जांच कराने की सिफारिश की गई है। कुलसचिव ने दावा किया है कि शासन ने धारा-8 के अंतर्गत विश्वविद्यालय में व्याप्त अनियमितताओं की जांच कराने की हरी झंडी दे दी है। निकाय चुनाव बाद जांच-पड़ताल शुरू होने की संभावना है।

Posted By: Jagran

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