आजमगढ़ [जयप्रकाश निषाद]। एनएच-233 फोरेलन के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान शारदा सहायक खंड-32 की चूक की वजह से अवैध तरीके से जमीन मालिकों के खाते में 3.64 करोड़ रुपये की धनराशि मुआवजे के रूप में भेज दी गई है। इस जमीन का मुआवजा 1983 में ही शारदा सहायक खंड-32 द्वारा दिया जा चुका है। इसे लेकर महकमा पूरी तरह से हांफ रहा हैं। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी व सीआरओ ने एसडीएम बूढऩपुर को तत्काल इस भूमि का दाखिल खारिज कराने का निर्देश दिया है।

चक नंबर 351 से 1.548 एकड़ रकबा नहर शारदा सहायक खंड-32 हेतु 13 जनवरी 1983 को मुकदमा नंबर सरकार बनाम काश्तकार को 22096.15 रुपया प्रतिकर दिया गया है। इसके बाद नहर बनीं। चक नंबर 351 से नया नंबर 59 बनाकर खतौनी काश्तकारों के नाम हो गई। जिनके नाम से खतौनी हुई थी उन लोगों की मौत हो गई। इसके बाद गांव निवासी उनके वारिस विनोद कुमार पुत्र जंग बहादुर, अनिल, सुनील, सुधीर पुत्रगण रमेश, छोहाड़ी पत्नी रमेश, सुरेश, बृजेश, प्रमोद पुत्रगण जयराम, लीलावती पत्नी जयराम, राजेश कुमार व रत्नेश पुत्रगण रंग बहादुर के गाटा संख्या 59 से ही 0.3376 हेक्टेयर एनएच-233 में अधिग्रहण करके 11 जून 2016 को 3 करोड़ 64 लाख 44 हजार 252 रुपये प्रतिकर दे दिया गया। गांव के ही वीरेंद्र पुत्र गजाधार ने विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी से इसकी शिकायत की कि दोबारा एक जमीन पर मुआवजा दे दिया गया है। इस पर उन्होंने अधिशासी अभियंता शारदा सहायक खंड-32 से रिपोर्ट मांगी तो रिपोर्ट में पता चला कि अधग्रहित भूमि का खारिज दाखिल ही नहर विभाग ने नहीं कराया है। इसकी वजह से मुआवजे की धनराशि संबंधित के खाते में चली गई है जबकि यह धनराशि शारदा सहायक खंड-32 के खाते में जानी चाहिए थी। अब सीआरओ पूरी रिपोर्ट मांग कर मामले के निस्तारण में जुटे हुए हैं।

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यह नहर विभाग की बड़ी चूक है। अधिग्रहण के दौरान किसी ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। यह उनके कार्यकाल से पहले का मामला है, इसलिए वह इसकी जांच पड़ताल करवा कर जल्द ही मामले का निबटारा करवा लेंगे। नहर विभाग के पक्ष में जमीन दाखिल खारिज करवा दी जाएगी।

हरीशंकर : सीआरओ, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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