जागरण संवाददाता, चंदौली : शासन प्रशासन की मैराथन दौड़ के बावजूद वनांचल के ग्रामीण मोबाइल कनेक्टिविटी से नहीं जुड़ पा रहे हैं। जबकि नीति आयोग के निर्देश पर 19 गांवों को दिसंबर 2018 तक ही संचार सेवा से जोड़ा जाना था, लेकिन कार्य योजना अभी भी फाइलों में ही चल रही है। ऐसे में यहां के ग्रामीणों को पेड़ों पर चढ़कर ही हेलो करना पड़ रहा है। योजना के तहत नौगढ़ के 17, चकिया व शहाबगंज के एक-एक गांव को शामिल किया गया था।

फेसबुक व व्हाट्सएप के जमाने में भी वनांचल के लगभग दो दर्जन गांवों के ग्रामीण आज भी आदिम युग में जी रहे हैं। सूचनाओं के आदान-प्रदान को उन्हें मीलों यात्रा कर कस्बा, बाजार का सहारा लेना पड़ रहा है। हाथों में मोबाइल तो है पर नेटवर्क की कमी उन्हें मायूस कर देती है। ऐसा लगता है मानों वे धरती के उस पार बसे हुए हैं। यदि किसी पर मुसीबत आ गई तो छटपटाहट के सिवाय कोई वश नहीं चलता।

हालांकि कुछ गांवों में किसी एक स्थान पर नेटवर्क पकड़ता तो है पर उन्हें पेड़ की शाखाओं पर चढ़कर बात करनी पड़ती है। वह भी पूरी बात हो जाएगी इस बात की गारंटी नहीं। वैसे इन गांवों में वर्षों से संचार सेवा को बीटीएस सिस्टम से जोड़ने का दावा सरकारें करती रही हैं, लेकिन किसी ने भी इस ओर ठोस प्रयास नहीं किया। वर्ष 2018 में जनपद के पिछड़े जिले में शामिल होने के बाद नीति आयोग (भारत सरकार) के सलाहकार राकेश रंजन के निर्देश पर गांवों को मोबाइल कनेक्टिविटी से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त तो हुआ लेकिन तीन वर्ष से ऊपर का समय व्यतीत होने के बावजूद कुछ नहीं हो पाया।

इन गांवों को मिलता लाभ

योजना के तहत नौगढ़ के जयमोहनी पोस्ता, डुमरिया, सरसताल, उदितपुर, पढ़ौती, मलवरिया, जरहर, लक्ष्मणपुर, भरदुआ, हनुमानपुर, टेकुरिया, देवखत, देवरीकला, सोनफुल, सपहर, लेड़हा, चकिया का पीतपुर व शहाबगंज विकास खंड का मूसाखाड़ गांव शामिल है।

Edited By: Saurabh Chakravarty

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