वाराणसी : काशी में 676 मेगावाट सौर ऊर्जा पैदा की जा सकती है। इससे वाराणसी ही नहीं आसपास के शहर भी बिजली के मामले में आत्मनिर्भर हो सकते हैं। शहर के सिर्फ 8.3 प्रतिशत छतों पर सोलर पैनल लगाने की जरूरत पडे़गी। नगर निगम के तहत आने वाली उन छतों को चिन्हित भी किया जा चुका है। जहां सूरज की अबाध रोशनी पहुंची है, ऐसे 8.1 वर्ग किलोमीटर की छतें हैं जहां अधिकतम सूरज की रोशनी पड़ती है। शनिवार को छावनी क्षेत्र स्थित एक होटल में आयोजित कार्यशाला में सेंटर फार इन्वायर्नमेंट एंड एनर्जी 'सीड' ने अपनी रिपोर्ट में यह आशाजनक परिदृश्य प्रस्तुत किया।

सीईओ रमापति कुमार ने बताया कि सभी आवासों की छतों पर सौर ऊर्जा के पैनल लगाए जा सकते हैं। इससे बिजली समस्या का निदान होगा और बढ़ती मांग का समाधान भी। बताया गया कि परंपरागत बिजली की तुलना में सौर ऊर्जा की कीमत कम है। इसका सबसे बड़ा लाभ पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा।

कार्यशाला का शुभारंभ बीएचयू के कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने किया। उन्होंने 'सीड' की रिपोर्ट का विमोचन भी किया। 'सीड' के निदेशक व रिपोर्ट के मुख्य लेखक अभिषेक प्रताप ने बताया कि बनारस अब बदलाव से गुजर रहा है, ऐसे में सौर ऊर्जा को भी अपनाने की जरूरत है। उपभोक्ताओं को 80 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलेगी और इस प्रकार प्रति यूनिट 1.45 रुपये की बचत होगी। यही है भविष्य की ऊर्जा, इसे अपनाने की ओर बढ़ें।

Posted By: Jagran

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